झारखंड राज्यसभा चुनाव: गठबंधन में ‘ऑल इज वेल’ की कवायद, कांग्रेस के डैमेज कंट्रोल मोड में आते ही बढ़ी हलचल
आकाश सिंह / रांची
रांची: झारखंड में राज्यसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही सत्ताधारी महागठबंधन (इंडिया ब्लॉक) के भीतर सियासी तापमान बढ़ गया है। कांग्रेस द्वारा प्रणव झा को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद से ही गठबंधन में उपजी नाराजगी को दूर करने के लिए कांग्रेस का आलाकमान हरकत में आ गया है।
कांग्रेस का डैमेज कंट्रोल, दिल्ली से रांची पहुंचे दिग्गज
गठबंधन में मचे घमासान और झामुमो की नाराजगी को देखते हुए, कांग्रेस ने तुरंत डैमेज कंट्रोल शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में पार्टी के वरिष्ठ नेता और ऑब्जर्वर भूपेश बघेल और अजय शर्मा रांची पहुंचे हैं। दोनों नेताओं ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बैठक का मुख्य उद्देश्य गठबंधन में पैदा हुए गतिरोध को समाप्त करना और सीट चयन को लेकर उपजे असंतोष को शांत करना है।
बैद्यनाथ राम पर झामुमो का दांव
दूसरी ओर, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने राज्यसभा के लिए अपने उम्मीदवार के तौर पर बैद्यनाथ राम के नाम पर मुहर लगा दी है। पार्टी के इस फैसले का बचाव करते हुए राज्यसभा सांसद महुआ मांझी ने कहा, “बैद्यनाथ राम एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं। पार्टी नेतृत्व ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही यह निर्णय लिया है, जो कि पूरी तरह सही है।” इस दौरान महुआ मांझी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की निर्णय लेने की क्षमता की खुलकर सराहना की और पार्टी की एकजुटता पर जोर दिया।
क्या खतरे में है गठबंधन?
राज्यसभा की सीट को लेकर झामुमो और कांग्रेस के बीच दिखी खींचतान को आगामी विधानसभा चुनावों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांग्रेस के सामने चुनौती: अपने उम्मीदवार के लिए सहयोगी दलों का समर्थन हासिल करना और गठबंधन में ‘बड़े भाई’ की भूमिका निभा रही झामुमो को साधे रखना।
झामुमो की रणनीति: अपनी पार्टी के कैडर और अनुभवी चेहरों को प्राथमिकता देकर राज्य में अपनी पकड़ को और मजबूत करना।
फिलहाल, सबकी नजरें कांग्रेस और झामुमो नेतृत्व के बीच हो रही बैठकों पर टिकी हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि महागठबंधन की दरारें भरती हैं या तनाव और गहराता है।

















