वेनेजुएला भूकंप : हताहतों की सटीक संख्या अभी भी अनिश्चित, USGS की चेतावनी 10000 मौत वाली चेतावनी से दुनिया चिंतित

वेनेजुएला भूकंप : 25 जून : वेनेजुएला में बुधवार शाम आए दो शक्तिशाली भूकंपों (7.2 और 7.5 तीव्रता) के बाद पूरे देश में हाहाकार मचा है। हालांकि राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं, लेकिन आपदा के लगभग 12 घंटे बाद भी सरकार ने हताहतों की कोई आधिकारिक संख्या जारी नहीं की है, जिससे अनिश्चितता और चिंता का माहौल बना हुआ है।
हताहतों और बचाव कार्य से जुड़ी प्रमुख बातें:
आधिकारिक स्थिति: कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने देश में ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ की घोषणा की है। उन्होंने हताहतों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है, लेकिन अब तक मृतकों या घायलों का कोई स्पष्ट आंकड़ा साझा नहीं किया है।
USGS का अनुमान: अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। उनके मॉडल-आधारित अनुमान के अनुसार, इस आपदा में मरने वालों की संख्या 10,000 से अधिक होने के 44 प्रतिशत अनुमान है। एजेंसी ने इसे “व्यापक स्तर की तबाही” करार दिया है।
जमीनी हकीकत: राजधानी काराकास के बारुता, चाको और अल्तामिरा इलाकों से इमारतें गिरने की कई खबरें हैं। बारुता के मेयर ने प्रारंभिक तौर पर 18 लोगों के सुरक्षित निकाले जाने की पुष्टि की है, लेकिन कई लोग अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका है।
राहत में बाधा: भूकंप के बाद संचार सेवाओं (इंटरनेट और बिजली) में आई भारी गिरावट के कारण दूरदराज के इलाकों से जानकारी मिलने में बड़ी चुनौती आ रही है। सिमोन बोलिवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बंद होने से राहत सामग्री पहुंचाने में भी कठिनाई हो रही है।
विपक्षी नेता एडमंडो गोंजालेज ने सोशल मीडिया पर स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा है, “भूकंप आए घंटों बीत चुके हैं, लेकिन हमारे पास अभी भी जान-माल के नुकसान की स्पष्ट जानकारी नहीं है। पैनिक का माहौल है और बचाव तंत्र सीमित संसाधनों से जूझ रहा है।”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी सोशल मीडिया पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वेनेजुएला में “बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है” और अमेरिका हर संभव मानवीय सहायता के लिए तैयार है।
दशकों की सबसे बड़ी आपदा:
विशेषज्ञों का कहना है कि यह 1900 के बाद से वेनेजुएला में आए सबसे शक्तिशाली भूकंपीय झटकों में से एक है। 10-15 किमी की कम गहराई होने के कारण झटकों की तीव्रता ज़मीन की सतह पर बहुत अधिक रही, जिससे इमारतों का मलबा सड़कों पर फैल गया है।
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