झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने छोड़ी सुरक्षा, प्रशासनिक आदेश से नाराज होकर लौटाया सरकारी अमला

नवीन कुमार
रांची: झारखंड की सियासत में इन दिनों वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का एक फैसला चर्चा का केंद्र बना हुआ है। मंत्री ने अपनी सुरक्षा में तैनात 16 सुरक्षाकर्मियों और सरकारी वाहनों को वापस लौटा दिया है। पिछले पांच दिनों से मंत्री बिना किसी सुरक्षा कवर के सार्वजनिक कार्यक्रमों और कैबिनेट की बैठकों में शामिल हो रहे हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर ‘सियासत’ और विवाद
मामले की शुरुआत तब हुई जब पुलिस मुख्यालय ने वित्त विभाग को पत्र भेजकर सुरक्षा के लिए आवंटित तीन वाहनों में से एक को वापस करने का आदेश दिया। मंत्री के पास फिलहाल 16 सुरक्षाकर्मियों की टीम तैनात थी। मंत्री का तर्क है कि 16 सुरक्षाकर्मियों को तीन गाड़ियों में बैठाना न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी गंभीर लापरवाही है।
अपमानजनक’ नोटिस से भड़के मंत्री
राधाकृष्ण किशोर ने इस मामले में नाराजगी जताते हुए डीजीपी को पत्र लिखा है। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहले ही 4 वाहनों की मांग की थी, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके विपरीत, वित्त विभाग के संयुक्त सचिव द्वारा उनके आप्त सचिव को भेजे गए नोटिस को उन्होंने अपने लिए अपमानजनक बताया। मंत्री का कहना है कि सुरक्षाकर्मियों को गाड़ियों में “ठूस-ठूस कर” ले जाना उचित नहीं है, जिसके चलते उन्होंने सुरक्षा लेने से साफ मना कर दिया है।
डीजीपी के निर्देश के बावजूद मंत्री का रुख कायम
भले ही डीजीपी ने सुरक्षाकर्मियों को मंत्री के आवास पर ही तैनात रहने का निर्देश दिया है, लेकिन राधाकृष्ण किशोर ने किसी भी दौरे या आधिकारिक काम के दौरान अपने साथ सुरक्षा लेने से इनकार कर दिया है। राज्य की राजधानी रांची में यह मामला अब प्रशासनिक शिथिलता और वीआईपी सुरक्षा के प्रोटोकॉल पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटना सरकार के भीतर चल रहे असंतोष और प्रशासनिक तालमेल की कमी को दर्शाती है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मामले को कैसे सुलझाती है।
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