सदर अस्पताल से देवेंद्र नाथ महतो का खुला पत्र, बोले- शरीर अस्पताल में, लेकिन संघर्ष का संकल्प अडिग

रांची: JPSC और JSSC में कथित भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन के बीच आंदोलनकारी छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सदर अस्पताल से खुला पत्र जारी किया है। अस्पताल में उपचाररत देवेंद्र नाथ महतो ने कहा है कि उनका शरीर भले ही अस्पताल में है, लेकिन न्याय के लिए संघर्ष का संकल्प अडिग है और मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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देवेंद्र नाथ महतो वर्तमान में सदर अस्पताल, रांची में प्रशासन की निगरानी में उपचाररत हैं। बताया गया है कि भूख हड़ताल के कारण उनकी तबीयत काफी कमजोर हो गई है। चिकित्सकों की ओर से आवश्यक जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे के उपचार को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

10वें दिन भी जारी रही भूख हड़ताल
JPSC-JSSC में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे ‘JPSC-JSSC भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती अभियान’ के तहत देवेंद्र नाथ महतो की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल मंगलवार को 10वें दिन भी जारी रही। आंदोलन के 9वें दिन विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद उन्हें एंबुलेंस से सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद उन्होंने भूख हड़ताल जारी रखने का संकल्प जताया है। अपने खुले पत्र में उन्होंने विधानसभा घेराव के दौरान पुलिस लाठीचार्ज और बल प्रयोग की निंदा की है।

पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे छात्रों और आंदोलनकारियों पर बल प्रयोग करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने झारखंड सरकार से विधानसभा घेराव के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में अनावश्यक बल प्रयोग की बात सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

‘झारखंडी छात्रों के सम्पूर्ण न्याय तक जारी रहेगी भूख हड़ताल’
देवेंद्र नाथ महतो ने अपने पत्र में कहा कि उनका शरीर अस्पताल में उपचाराधीन है, लेकिन न्याय के लिए उनका संघर्ष और संकल्प अडिग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंडी छात्रों के सम्पूर्ण न्याय तक उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी।


उन्होंने छात्र-युवा साथियों से संयम और एकजुटता बनाए रखने के साथ शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि झारखंड के छात्र-युवाओं के न्याय, सम्मान, पारदर्शिता और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था के अधिकार के लिए है। उन्होंने यह भी कहा कि लाठीचार्ज और बल प्रयोग से छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। आंदोलन संविधान और लोकतंत्र के दायरे में शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।




















