छात्रों से टकराव नहीं, तत्काल संवाद करे सरकार : आजसू पार्टी

रांची: JPSC-JSSC की परीक्षा एवं नियुक्ति व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और छात्रों की मांगों को लेकर पिछले 19 दिनों से जारी आंदोलन के बीच आजसू पार्टी ने राज्य सरकार से तत्काल छात्रों के साथ संवाद स्थापित करने की मांग की है। पार्टी ने सरकार को किसी भी तरह की दमनात्मक कार्रवाई से बचने की भी नसीहत दी है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!आजसू पार्टी के केंद्रीय कार्यालय, हरमू में बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय महासचिव डॉ. लंबोदर महतो, केंद्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत और केंद्रीय महासचिव संजय मेहता ने सरकार से छात्रों की समस्याओं का बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की।
लोकतंत्र में छात्रों की आवाज दबाई नहीं जा सकती : लंबोदर महतो
केंद्रीय महासचिव डॉ. लंबोदर महतो ने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं और छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। सरकार को टकराव का रास्ता छोड़कर बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 19 दिनों से छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इसे केवल कानून-व्यवस्था का विषय मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि यह युवाओं के भविष्य और उनके भरोसे से जुड़ा सवाल है।
उन्होंने सरकार से छात्रों के प्रतिनिधियों के साथ तत्काल संवाद स्थापित कर उनकी समस्याओं के समाधान की पहल करने की मांग की। साथ ही कहा कि 15 अगस्त से पहले छात्रों को बलपूर्वक हटाकर आंदोलन समाप्त कराने जैसी किसी भी कार्रवाई से सरकार को बचना चाहिए।

भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल : देवशरण भगत
केंद्रीय मुख्य प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत ने कहा कि JPSC-JSSC प्रकरण ने राज्य की पूरी भर्ती व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। केवल प्रशासनिक कार्रवाई या आंतरिक जांच से युवाओं के मन में पैदा हुए संदेह दूर नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि हजारों युवाओं के मन में नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल हैं और सरकार को इन सवालों का स्पष्ट एवं विश्वसनीय जवाब देना होगा। आजसू ने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र CBI जांच की मांग दोहराते हुए कहा कि जांच से वास्तविकता सामने आएगी और यदि कहीं अनियमितता या भ्रष्टाचार हुआ है तो दोषियों की जवाबदेही तय की जा सकेगी।
डॉ. भगत ने कहा कि सरकार का दायित्व आंदोलन को समाप्त कराना नहीं, बल्कि उस कारण का समाधान करना है, जिसके चलते युवा सड़क पर उतरने को मजबूर हुए हैं। छात्रों के साथ संवाद और संवेदनशीलता ही लोकतांत्रिक समाधान का रास्ता है।
पुलिस बल से नहीं, वार्ता से हो समस्या का समाधान : संजय मेहता
केंद्रीय महासचिव संजय मेहता ने कहा कि सरकार को छात्रों के धैर्य की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। लंबे समय से आंदोलनरत अभ्यर्थियों की समस्याओं का समाधान वार्ता की मेज पर होना चाहिए, न कि पुलिस बल के जरिए। उन्होंने कहा कि 19 दिनों से छात्र खुले आसमान के नीचे अपनी मांगों को लेकर बैठे हैं। यह किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए चिंता का विषय होना चाहिए। सरकार को छात्रों के बीच जाकर उनकी बात सुननी चाहिए और किसी भी तरह की जबरदस्ती या दमनात्मक कार्रवाई से बचना चाहिए।
संजय मेहता ने सरकार से छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के साथ तत्काल औपचारिक वार्ता करने और उनकी मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई का रोडमैप सामने रखने की मांग की।

आजसू ने रखीं छह प्रमुख मांगें
1. छात्रों से टकराव का रास्ता छोड़कर तत्काल और सार्थक संवाद शुरू किया जाए।
2. आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की दमनात्मक या बलपूर्वक कार्रवाई न की जाए।
3. 15 अगस्त से पहले आंदोलन समाप्त कराने के लिए किसी भी तरह की जबरदस्ती से सरकार बचे।
4. JPSC-JSSC प्रकरण की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र CBI जांच कराई जाए।
5. जांच के आधार पर दोषियों की जवाबदेही तय की जाए और युवाओं के भविष्य के साथ न्याय किया जाए।
6. राज्य की परीक्षा एवं नियुक्ति व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए ठोस सुधार किए जाएं।
आजसू पार्टी ने कहा कि JPSC-JSSC प्रकरण केवल परीक्षा या नियुक्ति का विषय नहीं है, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य और भर्ती व्यवस्था में उनके विश्वास से जुड़ा मामला है। पार्टी ने कहा कि युवाओं की आवाज सुनना सरकार की कमजोरी नहीं, बल्कि लोकतंत्र की मजबूती है। सरकार को छात्रों से टकराव के बजाय संवाद का रास्ता चुनना चाहिए।
















