पैसों की कमी से नहीं रुकेगी धड़कन, 25 बच्चे निःशुल्क हृदय सर्जरी के लिए कोच्चि रवाना

रांची: गरीब परिवारों के बच्चों के दिल में छेद और गंभीर जन्मजात हृदय रोग का इलाज अब आर्थिक परेशानी के कारण नहीं रुकेगा। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की पहल पर झारखंड के 25 बच्चों का दूसरा बैच सोमवार को अत्याधुनिक हृदय उपचार और जटिल सर्जरी के लिए केरल के कोच्चि स्थित अमृता अस्पताल रवाना हुआ।

इन बच्चों के इलाज का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। प्रत्येक बच्चे के उपचार पर करीब 10 लाख रुपये तक का खर्च सरकार की ओर से निःशुल्क कराया जाएगा। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बच्चों के महंगे इलाज की चिंता से राहत मिलेगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि दिल में छेद और जन्मजात हृदय रोग का उपचार काफी जटिल और महंगा होता है। गरीब परिवारों के लिए लाखों रुपये जुटाना मुश्किल होता है, जिसके कारण कई बच्चे समय पर इलाज नहीं करा पाते। इसी समस्या को देखते हुए जरूरतमंद बच्चों के उपचार की पहल की गई है।
उन्होंने बताया कि इस अभियान के तहत पहले बच्चों का एक बैच कोच्चि भेजा गया था, जहां उनका सफलतापूर्वक इलाज और ऑपरेशन हुआ। अब 25 बच्चों के दूसरे बैच को उपचार के लिए भेजा गया है। मंत्री ने कहा कि प्रयास है कि झारखंड के किसी भी गरीब बच्चे को पैसे के अभाव में बेहतर इलाज से वंचित न होना पड़े।

डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि उनकी प्राथमिकता जरूरतमंद बच्चों की जान बचाना और उन्हें स्वस्थ भविष्य देना है। उन्होंने सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों से अपील की कि उनके क्षेत्र में यदि कोई ऐसा बच्चा है, जिसके दिल में छेद या गंभीर जन्मजात हृदय रोग है और परिवार इलाज का खर्च उठाने में सक्षम नहीं है, तो उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाई जाए। ऐसे बच्चों के इलाज की जिम्मेदारी राज्य सरकार उठाएगी।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में है। आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का लाभ गरीब और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव केवल कागज पर नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए।

इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री की पहल से गरीब बच्चों को अत्याधुनिक हृदय उपचार उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बच्चों के इलाज के लिए उनके परिवार को अपनी जेब से एक रुपये भी खर्च नहीं करना होगा।

एमडी, एनएचएम शशि प्रकाश झा ने कहा कि जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों को समय पर अत्याधुनिक उपचार उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि इस अभियान को आगे भी जारी रखा जाएगा, ताकि गरीबी किसी बच्चे के इलाज में बाधा न बने।

बच्चों को कोच्चि रवाना करने की प्रक्रिया में रेलवे के डीआरएम सहित रेलवे विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी सहयोग किया। राज्य सरकार की इस पहल से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अपने बच्चों के बेहतर उपचार और स्वस्थ भविष्य की उम्मीद मिली है।

आरक्षण का आधार सिर्फ जाति नहीं: सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में बार-बार आया यह सिद्धांत, फिर आज आरक्षण के बहस में क्यों कम होती है इस बात की चर्चा ?
1963 से 2024 तक सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में जाति को पिछड़ेपन का एक आधार माना गया, लेकिन अकेला आधार नहीं; संविधान…

अवैध शराब के धंधे पर पुलिस का शिकंजा, दो फरार आरोपी गिरफ्तार
गोला: गोला थाना कांड संख्या 51/2026 में लंबे समय से फरार चल रहे दो प्राथमिकी अभियुक्तों को रामगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार कर…
















