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एशियाड 2026: भारत-पाकिस्तान फाइनल में फिर उठेगा ‘नो हैंडशेक’ का सवाल? मैदान पर होगी क्रिकेट की जंग

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एशियाई खेल 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट का फाइनल मुकाबला सिर्फ स्वर्ण पदक की जंग तक सीमित नहीं रहने वाला है। दोनों देशों के बीच हालिया क्रिकेट मुकाबलों में ‘नो हैंडशेक’ को लेकर हुई चर्चाओं के बीच अब निगाहें इस बात पर भी होंगी कि फाइनल के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ी एक-दूसरे का अभिवादन किस तरह करते हैं। भारत-पाकिस्तान के बीच पिछले कुछ मुकाबलों में पारंपरिक हाथ मिलाने की रस्म देखने को नहीं मिली है। 2025 के एशिया कप से शुरू हुई यह चर्चा 2026 के टी20 विश्व कप तक भी पहुंची। ऐसे में एशियाड फाइनल के बाद खिलाड़ियों के व्यवहार पर भी कैमरों की नजर रह सकती है।

एशियाड 2026 में भारत और पाकिस्तान एक बार फिर आमने-सामने हैं। मैदान पर मुकाबले का फैसला गेंद और बल्ले से होगा, लेकिन मैच के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच होने वाला अभिवादन भी सुर्खियों में रह सकता है। इस मुकाबले का संदर्भ इसलिए भी अलग है क्योंकि यह द्विपक्षीय क्रिकेट सीरीज नहीं, बल्कि एशियाई खेलों का मुकाबला है। एशियाई खेलों में खेल भावना और आपसी सम्मान का संदेश भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

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भारत-पाकिस्तान क्रिकेट में हैंडशेक का मुद्दा 2025 के एशिया कप के दौरान प्रमुखता से सामने आया। मुकाबले के बाद दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच पारंपरिक तरीके से हाथ मिलाने का दृश्य नहीं दिखा। इसके बाद यह मामला क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन गया। 2026 के टी20 विश्व कप में भी टॉस और मैच के बाद हैंडशेक को लेकर ऐसी ही तस्वीरों ने ध्यान खींचा। अब सवाल यह है कि क्या क्रिकेट में बना यह पैटर्न एशियाई खेलों के फाइनल में भी नजर आएगा।

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एशियाई खेल Olympic Council of Asia (OCA) के तहत आयोजित होते हैं। हालांकि प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों के बीच हाथ मिलाना मैच संचालन के लिए अनिवार्य नियम नहीं है, लेकिन मुकाबले के बाद अभिवादन को लंबे समय से खेल भावना का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि भारत-पाकिस्तान फाइनल में मैच खत्म होने के बाद का दृश्य भी खासा महत्वपूर्ण हो सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों टीमों के खिलाड़ी हाथ मिलाते हैं, सिर झुकाकर अभिवादन करते हैं या बिना पारंपरिक हैंडशेक के आगे बढ़ते हैं।

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एशियाई खेलों में भारत और पाकिस्तान के खिलाड़ियों के बीच क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों में सामान्य खेल भावना के दृश्य देखने को मिलते रहे हैं। टेबल टेनिस जैसे मुकाबलों में दोनों देशों के खिलाड़ियों ने मैच के बाद एक-दूसरे का अभिवादन किया है। ऐसे में यह सवाल और दिलचस्प हो जाता है कि क्या क्रिकेट में दोनों देशों के बीच हाल में चर्चा में रहा ‘नो हैंडशेक’ एशियाड में भी जारी रहेगा या यहां तस्वीर अलग देखने को मिलेगी।

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‘नो हैंडशेक’ की चर्चा सिर्फ पुरुष क्रिकेट तक सीमित नहीं रही है। भारत और पाकिस्तान की महिला टीमों के मुकाबलों में भी टॉस और मैच के दौरान पारंपरिक अभिवादन नहीं होने की घटनाएं चर्चा में रही हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के कुछ अन्य मुकाबलों में भी टॉस के दौरान खिलाड़ियों के हाथ नहीं मिलाने के मामले सामने आए हैं। इससे यह स्पष्ट है कि हर मुकाबले में हैंडशेक की परंपरा एक जैसी नहीं दिखाई देती।

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अंतरराष्ट्रीय खेलों में राजनीतिक या कूटनीतिक तनाव की पृष्ठभूमि में खिलाड़ियों द्वारा प्रतिद्वंद्वी से हाथ नहीं मिलाने के उदाहरण पहले भी सामने आए हैं। 2016 रियो ओलंपिक में मिस्र के जूडो खिलाड़ी इस्लाम एल शहाबी ने इजरायल के ओर सासोन से मुकाबले के बाद हाथ मिलाने से इनकार किया था। इस घटना पर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने कार्रवाई भी की थी। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद विभिन्न खेलों में यूक्रेनी खिलाड़ियों द्वारा रूसी या बेलारूसी खिलाड़ियों से हाथ नहीं मिलाने के मामले भी सामने आए हैं।

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भारत-पाकिस्तान फाइनल में असली मुकाबला मैदान पर होगा, लेकिन मैच खत्म होने के बाद कैमरों की नजर खिलाड़ियों पर भी रहेगी। क्या दोनों कप्तान एक-दूसरे की ओर बढ़ेंगे? क्या हाथ आगे बढ़ेगा? या फिर सिर्फ सिर झुकाकर अभिवादन किया जाएगा? अगर दोनों टीमें पदक समारोह में एक साथ मौजूद होती हैं, तो वहां भी खिलाड़ियों के व्यवहार पर ध्यान रहेगा।

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भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मुकाबलों को दोनों देशों के रिश्तों के संदर्भ में भी देखा जाता रहा है। द्विपक्षीय क्रिकेट सीमित होने के कारण बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में होने वाले मुकाबलों का महत्व और बढ़ जाता है। ऐसे में एशियाड का फाइनल भी कई स्तरों पर खास होगा। स्वर्ण पदक का फैसला गेंद और बल्ले से होगा, लेकिन मैच के बाद खिलाड़ियों के ‘हाथ’ क्या संदेश देते हैं, इस पर भी सबकी नजर रहेगी।

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नवीन कुमार

नवीन कुमार

Editor In Chief

नवीन कुमार को पिछले 30 वर्षों से भी अधिक समय से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव रहा है...इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बड़े पद पर कार्यरत रहे हैं...नक्सल, क्राइम, खेल, राजनीति,बिज्ञान एवं तकनीकी, पर्यावरण के साथ ही समसामयिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर मजबूत पकड़ रही है। खाली समय में उन्हें नई जगहों पर घूमना और फोटोग्राफी करना पसंद है।