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बीता हुआ समय आखिर गया कहां? सिमडेगा के शिक्षक-अनुसंधानकर्ता अंजनी कुमार सिंह की शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल में जगह

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सिमडेगा: ‘समय बीत गया’—यह वाक्य हम रोज कहते हैं, लेकिन बीता हुआ समय आखिर जाता कहां है? क्या समय बीतने के बाद भी उसका कोई भौतिक अवशेष वर्तमान में मौजूद रहता है? इसी मौलिक सवाल को केंद्र में रखकर झारखंड के शिक्षक-अनुसंधानकर्ता अंजनी कुमार सिंह ने समय के अस्तित्व और उसकी प्रकृति को समझने की नई वैज्ञानिक-दार्शनिक पड़ताल प्रस्तुत की है। उनकी शोध-पांडुलिपि *“Does Elapsed Time Leave a Physical Residue? A Future-Operational Framework”* को अंतरराष्ट्रीय जर्नल *Studies in History and Philosophy of Science* में स्थान मिला है।

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इस शोध में समय, भौतिक अवस्थाओं और सूचना के बीच संबंधों को एक नए ऑपरेशनल दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया गया है। शोधकर्ता ने विशेष रूप से यह सवाल उठाया है कि क्या भविष्य में किए जाने वाले मापों के आधार पर बीते हुए समय की किसी भौतिक पहचान का पता लगाया जा सकता है।

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शोध-पत्र में क्वांटम सिस्टम और सूचना-आधारित उदाहरणों के जरिए समय की ऑन्टोलॉजी यानी उसके अस्तित्व की प्रकृति, टेम्पोरल इन्फॉर्मेशन, फिजिकल मेमोरी तथा क्वांटम प्रणालियों से जुड़े संभावित अनुसंधान प्रश्नों पर चर्चा की गई है। इसका उद्देश्य समय के बीतने और उसके भौतिक प्रभावों को लेकर नए वैज्ञानिक एवं दार्शनिक विमर्श की संभावनाओं को सामने लाना है।

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अंजनी कुमार सिंह के अनुसार, “हम समय के बीतने को स्वीकार करते हैं, लेकिन शायद सबसे सरल प्रश्न हमने अभी तक पर्याप्त गंभीरता से नहीं पूछा—बीत जाने के बाद समय का अस्तित्वगत दर्जा क्या है?” शोध-पांडुलिपि के लिए जर्नल की ओर से प्रो. रेचल एंकेनी को संपादक नियुक्त किया गया है। यह अध्ययन समय की प्रकृति से जुड़े सवालों की पड़ताल के लिए एक संभावित नए ऑपरेशनल फ्रेमवर्क का प्रस्ताव करता है।

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उल्लेखनीय है कि कुछ ही दिन पहले अंजनी कुमार सिंह द्वारा विकसित *Biological Dynamic Convergence Theory* को भी स्प्रिंगर नेचर के एक जर्नल में स्थान मिलने की जानकारी सामने आई थी। इस शोध से जुड़े कार्य पर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे की पड़ताल जारी है। झारखंड के एक शिक्षक के रूप में कार्य करते हुए अंजनी कुमार सिंह का समय और जैविक प्रणालियों जैसे विषयों पर शोध करना उल्लेखनीय है। उनके शोध-विचारों को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक एवं दार्शनिक प्रकाशनों में जगह मिलना राज्य के शोध और अकादमिक क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

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शंभू कुमार सिंह

शंभू कुमार सिंह

रिपोर्टर

शंभू कुमार सिंह सिमडेगा के रहने वाले हैं ये 1995 से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत है दैनिक जागरण जिला प्रभारी, भास्कर दैनिक का जिला प्रभारी, सहित की भी चैनल के साथ में अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में लगातार सक्रिय रहे है । समाचार संकलन विशेष लेख फीचर व अन्य क्षेत्रों में भी विशेष पकड़।