चतरा से उठाकर वाराणसी में ‘फर्जी एनकाउंटर’ का आरोप, बृजेश गंझू की मौत पर पूर्व विधायक ने उठाए सवाल
सिमरिया के पूर्व विधायक गणेश गंझू का दावा—पहले माओवादियों के खिलाफ इस्तेमाल किया, फिर कर दी गई हत्या; CBI जांच की मांग
चतरा। टीएसपीसी सुप्रीमो बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता की वाराणसी में यूपी एटीएस के साथ हुई मुठभेड़ में मौत के बाद मामले को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सोमवार को बृजेश का शव चतरा जिले के लावालौंग थाना क्षेत्र स्थित उसके पैतृक गांव लुट्टू सोहावन पहुंचा। इसके बाद उसके छोटे भाई और सिमरिया के पूर्व विधायक गणेश गंझू ने मुठभेड़ की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए।
गणेश गंझू का आरोप है कि बृजेश को पहले चतरा से पकड़ा गया और बाद में उत्तर प्रदेश ले जाकर उसकी मौत को मुठभेड़ का रूप दिया गया। उन्होंने इस मामले को कथित फर्जी एनकाउंटर बताते हुए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

पूर्व विधायक ने झारखंड पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि बृजेश को पहले माओवादियों के खिलाफ इस्तेमाल किया गया और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए सीबीआई से जांच कराई जानी चाहिए।
गणेश गंझू ने मुठभेड़ में हुई कथित फायरिंग के पुलिस के दावे पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि यदि बृजेश बाइक चला रहा था, तो वह एक साथ दोनों हाथों से किस तरह फायरिंग कर सकता था। उन्होंने इसी सवाल के आधार पर मुठभेड़ की परिस्थितियों की विस्तृत जांच की मांग की है।

पुलिस का दावा क्या है?
दूसरी ओर, उपलब्ध पुलिस-आधारित रिपोर्टों के अनुसार, वाराणसी के रामनगर थाना क्षेत्र में रविवार तड़के यूपी एटीएस की टीम ने बृजेश गंझू को रोकने का प्रयास किया था। रिपोर्टों में पुलिस के हवाले से कहा गया है कि उसने एटीएस टीम पर गोली चलाई, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई हुई और वह घायल हो गया। अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया।

रिपोर्टों के मुताबिक बृजेश गंझू पर झारखंड सरकार की ओर से 25 लाख रुपये और एनआईए की ओर से 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह टीपीसी से जुड़ा था और एनआईए के मामलों में भी वांछित बताया गया है।
फिलहाल मुठभेड़ को लेकर पूर्व विधायक द्वारा लगाए गए आरोप और पुलिस की ओर से सामने आया मुठभेड़ का आधिकारिक पक्ष अलग-अलग हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच या किसी जांच एजेंसी की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनाक्रम वास्तव में क्या था।

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