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पर्व-त्योहारों में आज भी कायम है गोसाई परिवार की पुश्तैनी पहचान, जितिया, कर्मा और तीज में बढ़ जाती है माला, सिंदूर और पूजा सामग्री की मांग

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सिमडेगा: बदलते दौर में बाजार और लोगों की जीवनशैली भले ही बदल गई हो, लेकिन सिमडेगा के मधुबन का गोसाई परिवार आज भी अपनी पुश्तैनी परंपरा को जीवित रखे हुए है। परिवार की कई पीढ़ियां पर्व-त्योहारों में पूजा-पाठ के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने के काम से जुड़ी हैं। खासकर जितिया, कर्मा और तीज जैसे पर्वों के दौरान माला, सिंदूर और अन्य पूजा सामग्री की मांग बढ़ जाती है।

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पर्व आते ही गोसाई परिवार के लोग अलग-अलग स्थानों पर अस्थायी दुकानें लगाकर पूजा सामग्री बेचते हैं। इन दुकानों पर महिलाओं की विशेष भीड़ देखने को मिलती है। पर्व के अनुसार माला, सिंदूर और पूजा में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री बाजार में उपलब्ध कराई जाती है।

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गोसाई परिवार के रामु गोसाई बताते हैं कि पूजा सामग्री बेचने का काम उनके परिवार का पुश्तैनी व्यवसाय है। उनके अनुसार, उनके परिवार और समाज के लोग आजादी से पहले से ही पूजा-पाठ में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बेचते आ रहे हैं। कई पीढ़ियों से यह परंपरा एक-दूसरे को सौंपी जाती रही है।

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पर्व-त्योहारों में ग्राहकों की जरूरत के अनुसार पूजा सामग्री जुटाने के लिए परिवार को रांची, बनारस और कोलकाता जैसे बड़े बाजारों का सहारा लेना पड़ता है। अलग-अलग पर्व के हिसाब से माला, सिंदूर और दूसरी पूजन सामग्री मंगाई जाती है।

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रामु गोसाई के मुताबिक, पहले सिंदूर तैयार करने की भी पारंपरिक विधि थी। पेड़ के फलों के बीज को घिसकर सिंदूर बनाया जाता था। हालांकि समय के साथ यह परंपरा लगभग खत्म हो गई। अब बाजार में मिल में तैयार सिंदूर का इस्तेमाल ज्यादा होने लगा है। ग्राहकों में आकर्षक और सुंदर सिंदूर की बढ़ती मांग ने भी पारंपरिक सिंदूर के चलन को प्रभावित किया है।

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रामु गोसाई का कहना है कि सिमडेगा जिले में गोसाई समाज के करीब 95 प्रतिशत परिवार आज भी पारंपरिक रूप से पूजा-पाठ की सामग्री बेचने के काम से जुड़े हैं। उनके लिए यह काम केवल आमदनी का जरिया नहीं, बल्कि परिवार और समाज की पीढ़ियों पुरानी पहचान भी है।

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आधुनिक बाजार और बदलती जीवनशैली के बीच कई पारंपरिक व्यवसाय धीरे-धीरे सिमट रहे हैं। इसके बावजूद गोसाई परिवार का यह कारोबार आज भी पर्व-त्योहारों के साथ जुड़ा हुआ है। आस्था, परंपरा और रोजी-रोटी के बीच यह पुश्तैनी काम उनकी सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ा रहा है।

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शंभू कुमार सिंह

शंभू कुमार सिंह

रिपोर्टर

शंभू कुमार सिंह सिमडेगा के रहने वाले हैं ये 1995 से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत है दैनिक जागरण जिला प्रभारी, भास्कर दैनिक का जिला प्रभारी, सहित की भी चैनल के साथ में अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में लगातार सक्रिय रहे है । समाचार संकलन विशेष लेख फीचर व अन्य क्षेत्रों में भी विशेष पकड़।