रांची : हरतालिका तीज पर शिव-पार्वती की आराधना, अखंड सौभाग्य की कामना के साथ महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत
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रांची। हरतालिका तीज के अवसर पर सोमवार को राजधानी रांची समेत झारखंड के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धा और भक्ति का माहौल रहा। सुहागिन महिलाओं ने भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कई महिलाओं ने परंपरा के अनुसार निर्जला व्रत रखकर शिव-पार्वती की आराधना की।
सुबह से ही घरों और मंदिरों में पूजा की तैयारियां शुरू हो गई थीं। महिलाओं ने स्नान कर नए वस्त्र धारण किए और मेहंदी, चूड़ी, सिंदूर सहित सुहाग सामग्री से श्रृंगार किया। इसके बाद पूजा स्थल पर भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की गई।
पूजा के दौरान भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र और फूल अर्पित किए गए, जबकि माता पार्वती को सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी, चुनरी और अन्य सुहाग सामग्री चढ़ाई गई। गणेश पूजन के बाद महिलाओं ने हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनी और शिव-पार्वती की आरती की। पूजा के दौरान महिलाओं ने परिवार की खुशहाली, वैवाहिक जीवन में प्रेम और आपसी विश्वास बनाए रखने की प्रार्थना की।
शिव-पार्वती के जयघोष से गूंजे पूजा स्थल
पूजा के दौरान कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से भगवान शिव और माता पार्वती के भजन-कीर्तन किए। मंदिरों और पूजा स्थलों पर ‘हर-हर महादेव’ और ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा। महिलाओं ने एक-दूसरे को तीज की शुभकामनाएं दीं और सुहाग सामग्री का आदान-प्रदान भी किया।

पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना
हरतालिका तीज को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना की, जबकि अविवाहित कन्याओं ने अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की।
धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी मान्यता के कारण हरतालिका तीज को प्रेम, समर्पण, वैवाहिक सुख और अखंड सौभाग्य का पर्व माना जाता है।
पूजा संपन्न होने के बाद भी महिलाओं में व्रत को लेकर उत्साह बना रहा। परिवार के सदस्यों ने भी पूजा में शामिल होकर शिव-पार्वती का आशीर्वाद लिया। पूरे दिन घरों में तीज के गीत, भजन और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला जारी रहा।

















