बिहार SIR मामला: सुप्रीम कोर्ट में आज होगी अहम सुनवाई, 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाने पर विवाद
नई दिल्ली: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज (12 अगस्त, 2025) अहम सुनवाई होगी। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ इस मामले में याचिकाओं पर सुनवाई करेगी, जो बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग के 24 जून, 2025 के आदेश को चुनौती दे रही हैं। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि SIR के तहत 65 लाख मतदाताओं के नाम बिना उचित कारण के हटाए गए हैं, जिससे मतदाताओं के अधिकारों का हनन हो सकता है।
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR), राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद मनोज झा, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और अन्य याचिकाकर्ताओं ने SIR की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए हैं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इस प्रक्रिया के जरिए बड़े पैमाने पर मतदाताओं को मतदाता सूची से हटाया जा रहा है, जो विशेष रूप से गरीब और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को प्रभावित करेगा। याचिकाओं में कहा गया है कि SIR एक तरह से नागरिकता जांच की प्रक्रिया बन गई है, जो चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
चुनाव आयोग ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा कि वह कानूनी दायरे में काम कर रहा है और ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए नामों की अलग सूची सार्वजनिक करना जरूरी नहीं है। आयोग ने बताया कि जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें नोटिस जारी किया जाएगा और दो स्तरों पर अपील का अवसर दिया जाएगा। इसके अलावा, 1 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट सूची के बाद 31 दिनों तक (1 सितंबर तक) दावे और आपत्तियां दर्ज करने का समय है, जिसके बाद अंतिम सूची 30 सितंबर को प्रकाशित होगी। आयोग ने यह भी कहा कि उसने सभी बड़े अखबारों में विज्ञापन और प्रेस रिलीज के जरिए मतदाताओं को जागरूक किया है।
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यदि SIR के कारण मतदाताओं का बड़े पैमाने पर बहिष्कार होता है या जीवित व्यक्तियों को मृत घोषित कर उनके नाम हटाए जाते हैं, तो वह तुरंत हस्तक्षेप करेगा। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा था कि वे ड्राफ्ट सूची में अनियमितताओं के सबूत, जैसे जीवित मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले, पेश करें। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड को पहचान के लिए स्वीकार किया जाए।
आज की सुनवाई में कोर्ट ड्राफ्ट मतदाता सूची में कथित त्रुटियों और 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाने के दावों पर विचार करेगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और प्रशांत भूषण ने तर्क दिया है कि चुनाव आयोग की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और यह मतदाताओं के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन कर सकती है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध करना है, जिसमें अयोग्य व्यक्तियों, जैसे मृत या स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं, को हटाना शामिल है।

















