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सरकारी अस्पतालों में खून का संकट: रिप्लेसमेंट डोनर के बावजूद मरीजों को नहीं मिल रहा ब्लड, निजी ब्लड बैंकों का सहारा

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 रांची : झारखंड के सरकारी अस्पतालों में खून की कमी गंभीर समस्या बनती जा रही है। मीडिया रिपोर्ट की माने तो राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) और सदर अस्पताल जैसे प्रमुख सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त ब्लड स्टॉक नहीं होने से मरीजों और उनके परिजनों को समय पर रक्त उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। हालात ऐसे हैं कि कई मामलों में रिप्लेसमेंट डोनर उपलब्ध होने के बावजूद मरीजों को ब्लड जारी नहीं किया जा रहा, जिससे उन्हें निजी ब्लड बैंकों का सहारा लेना पड़ रहा है।

इमरजेंसी मरीजों के इलाज में हो रही देरी

रिपोर्ट्स के अनुसार परिजनों का कहना है कि खून की कमी के कारण बड़ी सर्जरी, दुर्घटना और रक्त संबंधी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों का इलाज प्रभावित हो रहा है। समय पर रक्त नहीं मिलने से ऑपरेशन और अन्य आवश्यक चिकित्सा प्रक्रियाओं में देरी हो रही है।

निजी ब्लड बैंक से लेना पड़ रहा खून

सरकारी अस्पतालों में स्टॉक नहीं होने के कारण मरीजों के परिजन निजी ब्लड बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। यहां एक यूनिट रक्त के लिए 1,570 रुपये प्रोसेसिंग शुल्क देना पड़ रहा है। इसके साथ ही रिप्लेसमेंट डोनर की व्यवस्था भी करनी पड़ रही है, जिससे आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का बोझ बढ़ रहा है।

CTVS में भर्ती बच्चे की सर्जरी पर संकट

RIMS के कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग में भर्ती एक बच्चे को सर्जरी के लिए **A-पॉजिटिव पैक्ड रेड ब्लड सेल्स** की जरूरत थी। परिजनों का आरोप है कि डोनर उपलब्ध होने के बावजूद अस्पताल से ब्लड जारी नहीं किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक परिवार के एक सदस्य ने कहा,

“हमारे बच्चे की सर्जरी समय पर खून मिलने पर निर्भर थी। हर घंटे की देरी हमारी चिंता बढ़ा रही थी। आखिरकार हमें निजी ब्लड बैंक का सहारा लेना पड़ा।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक दूसरे मरीज को भी निजी ब्लड बैंक से मिला रक्त

एक अन्य मरीज एम. प्रकाश को B-पॉजिटिव रक्त की आवश्यकता थी। उनके परिजनों ने बताया कि रिप्लेसमेंट डोनर की व्यवस्था करने के बावजूद सरकारी अस्पताल से रक्त नहीं मिल सका। कई ब्लड बैंकों के चक्कर लगाने के बाद आखिरकार उन्हें निजी ब्लड बैंक से आवश्यक यूनिट उपलब्ध हुई।

परिवार के सदस्य ने कहा,

“हम एक ब्लड बैंक से दूसरे ब्लड बैंक भटकते रहे। उस समय हमारी प्राथमिकता मरीज का इलाज थी, लेकिन हमें रक्त की तलाश में परेशान होना पड़ा।”

सदर अस्पताल में सिर्फ 27 यूनिट ब्लड

रिपोर्ट्स के मुताबिक नियमित रक्तदान शिविर आयोजित किए जाने के बावजूद ब्लड कलेक्शन मांग के अनुरूप नहीं हो पा रहा है। रांची के सदर अस्पताल में शनिवार तक केवल 27 यूनिट रक्त उपलब्ध था। सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि A-पॉजिटिव और A-नेगेटिव ब्लड ग्रुप का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है। हालांकि सरकारी पोर्टल ई-रक्तकोष के अनुसार, RIMS में कुल 84 यूनिट रक्त उपलब्ध बताया गया है।

प्रशासन का दावा

रिपोर्ट्स के मुताबिक रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि ब्लड स्टॉक बनाए रखने के लिए कॉलेजों, अस्पतालों, कलेक्ट्रेट और अन्य सरकारी कार्यालयों में समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा,

“सरकारी संस्थान लगातार ब्लड डोनेशन कैंप आयोजित कर रहे हैं ताकि ब्लड स्टॉक पर्याप्त बना रहे और जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सके।”

 

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