नियमों के विरुद्ध बस किराया वृद्धि पर उठे सवाल, प्रशासन की चुप्पी से यात्रियों में नाराजगी

शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा जिले में हाल ही में बस किराए में की गई बढ़ोतरी को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बस संचालकों द्वारा यात्री किराए में करीब 10 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि किए जाने के बाद आम लोगों ने इसकी वैधता और प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नागरिकों का आरोप है कि किराया बढ़ाने से पहले न तो जिला प्रशासन की अनुमति ली गई और न ही संबंधित विभागों के साथ कोई औपचारिक विचार-विमर्श किया गया।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई मामूली बढ़ोतरी के बाद जिले के बस संचालकों और बस यूनियन ने यात्री किराया बढ़ा दिया। इसका सीधा असर रोजाना यात्रा करने वाले छात्रों, मजदूरों, कर्मचारियों और ग्रामीण यात्रियों पर पड़ रहा है।
किराया निर्धारण पर उठे कानूनी सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सार्वजनिक परिवहन का किराया तय करना या उसमें संशोधन करना किसी निजी संस्था का अधिकार नहीं है। यह एक नियामक प्रक्रिया है, जिसके तहत राज्य सरकार अथवा अधिकृत सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति आवश्यक होती है। ऐसे में बिना अनुमति किराया बढ़ाना नियमों के विरुद्ध माना जा सकता है।
2018 में भी उठा था यही मुद्दा
बस किराया वृद्धि का यह मामला नया नहीं है। वर्ष 2018 में भी इसी तरह का विवाद सामने आया था। उस समय सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया था कि राज्य के भीतर संचालित बसों के किराए का निर्धारण करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। बिना सरकारी स्वीकृति के बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन द्वारा की गई किराया वृद्धि को वैध नहीं माना जा सकता और ऐसे मामलों में कार्रवाई का भी प्रावधान है।
परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार किराया संशोधन से पहले संबंधित विभागों, जिला प्रशासन और हितधारकों के साथ विचार-विमर्श की प्रक्रिया अपनाई जाती है, ताकि यात्रियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
प्रशासनिक स्वीकृति पर सवाल
वर्तमान किराया वृद्धि को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इसके लिए जिला प्रशासन, अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) अथवा राज्य परिवहन विभाग से अनुमति ली गई थी। यदि नहीं, तो बढ़ा हुआ किराया नियमों के अनुरूप है या नहीं, यह जांच का विषय बन गया है।
लोगों का कहना है कि यदि डीजल की कीमतों में वृद्धि अथवा परिचालन लागत बढ़ने के कारण किराया संशोधन आवश्यक था, तो बस संचालकों को प्रशासन के समक्ष प्रस्ताव प्रस्तुत कर नियमानुसार अनुमति प्राप्त करनी चाहिए थी। मनमाने तरीके से किराया बढ़ाने से आम यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
जनप्रतिनिधियों ने मांगी जानकारी
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बस यूनियन सिमडेगा के अध्यक्ष दिलीप तिर्की ने कहा कि उन्हें किराया वृद्धि की जानकारी नहीं है। वहीं विधायक विक्सल कोंगाड़ी ने कहा कि हाल में हुई किराया वृद्धि की जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने मामले की जानकारी प्राप्त कर उचित स्तर पर इसे उठाने की बात कही।
जिला परिवहन पदाधिकारी संजय बाखला ने कहा कि पूरे मामले की जांच की जाएगी और यह देखा जाएगा कि किराया वृद्धि में नियमों का पालन किया गया है या नहीं।
जांच और कार्रवाई की मांग तेज
सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा यह स्पष्ट करने की मांग की है कि किराया वृद्धि किस आधार पर की गई और क्या इसके लिए सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त थी। साथ ही नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित बस संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कानून का समान रूप से पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि नियमों की अनदेखी पर कार्रवाई नहीं होती है, तो इससे जनता का शासन-प्रशासन पर विश्वास प्रभावित हो सकता है। फिलहाल जिले के यात्री प्रशासन के आधिकारिक रुख और संभावित कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।

















