50 Students Can Now Go Abroad; 'Suspense' Over Bhojpuri and Magahi Persists

झारखंड कैबिनेट का बड़ा फैसला: अब 50 छात्र जा सकेंगे विदेश, भोजपुरी-मगही पर ‘सस्पेंस’ बरकरार

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झारखंड कैबिनेट का बड़ा फैसला: अब 50 छात्र जा सकेंगे विदेश, भोजपुरी-मगही पर ‘सस्पेंस’ बरकरार

50 Students Can Now Go Abroad; 'Suspense' Over Bhojpuri and Magahi Persists

आकाश सिंह

रांची:  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में राज्य सरकार ने शिक्षा और प्रशासनिक सुधारों को लेकर कई ऐतिहासिक निर्णयों पर मुहर लगाई। बैठक में कुल 15 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें **मरांग गोमके छात्रवृत्ति योजना** का विस्तार सबसे प्रमुख रहा। वहीं, भाषाई विवाद को सुलझाने के लिए सरकार ने बीच का रास्ता चुना है।

विदेशी छात्रवृत्ति योजना 2026: अब उड़ान होगी और बड़ी

झारखंड के मेधावी युवाओं के लिए विदेश में पढ़ाई का सपना अब और आसान होगा। सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा विदेशी छात्रवृत्ति योजना 2026 के संशोधित स्वरूप को मंजूरी दे दी है।
इस योजना के तहत अब लाभार्थियों की संख्या बढ़ाकर 50 कर दी गई है। चयनित छात्र यूनाइटेड किंगडम और नॉर्दर्न आयरलैंड के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में मास्टर्स और फुल डिग्री प्रोग्राम कर सकेंगे। खास बात यह है कि ट्यूशन फीस से लेकर रहने-खाने तक का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी। भविष्य में इस योजना का विस्तार अमेरिका और कनाडा तक करने का भी प्रावधान किया गया है।

श्रेणीवार सीटों का विवरण:

अनुसूचित जनजाति: 20 छात्र
अनुसूचित जाति: 10 छात्र
पिछड़ा वर्ग:14 छात्र
अल्पसंख्यक: 06 छात्र

भाषाई मुद्दा: भोजपुरी, अंगिका और मगही के लिए करना होगा इंतजार

क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में भोजपुरी, अंगिका और मगही को शामिल करने की चर्चा तेज थी, लेकिन कैबिनेट ने फिलहाल इस पर कोई सीधा फैसला नहीं लिया है। हालांकि, बैठक में मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने इन भाषाओं का पक्ष मजबूती से रखा।
विवाद और संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्यमंत्री ने एक विशेष समिति (कमेटी) के गठन का एलान किया है। यह समिति भाषाई आधार और जनभावनाओं का गहराई से अध्ययन करेगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। समिति की सिफारिशों के बाद ही इन भाषाओं को क्षेत्रीय सूची में शामिल करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

विरासत और विकास का संगम

जहाँ एक ओर छात्रवृत्ति योजना का विस्तार महान जयपाल सिंह मुंडा की विरासत को सम्मान देने और राज्य के पिछड़े वर्ग को वैश्विक पहचान दिलाने की कोशिश है, वहीं दूसरी ओर भाषाई समिति का गठन राजनीतिक और सामाजिक संतुलन बनाए रखने का सरकार का एक सधा हुआ कदम माना जा रहा है।

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