झारखंड राज्यसभा रण: नामांकन में दिखा शक्ति प्रदर्शन, प्रस्तावकों से मजबूत हुई उम्मीदवार की दावेदारी
रांची: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए चल रही सियासी जंग अब अपने अंतिम चरण में है। सोमवार को नामांकन के आखिरी दिन झामुमो के बैजनाथ राम , कांग्रेस के प्रणव झा और निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवाणी ने अपने-अपने पर्चे दाखिल कर दिए। इस दौरान सभी उम्मीदवारों ने अपने नामांकन में ‘पॉवरफुल’ प्रस्तावकों को शामिल कर अपनी राजनीतिक साख का प्रदर्शन किया।
बैजनाथ राम (JMM): मुख्यमंत्री सहित दिग्गजों का कवच**
झामुमो प्रत्याशी बैजनाथ राम के नामांकन के दौरान पार्टी की एकजुटता देखने लायक थी। उन्होंने दो सेटों में नामांकन भरा, जिसमें राज्य के शीर्ष नेतृत्व से लेकर युवा नेताओं तक का जमावड़ा रहा।
पहला सेट: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन , स्टीफन मरांडी, मथुरा महतो, उदय शंकर सिंह, लुइस मरांडी, सविता महतो, समीर मोहंती, अनंत प्रताप देव, जिग्गा सुसारन होरो और सजीव सरदार।
दूसरा सेट: बसंत सोरेन, हफीजुल हसन अंसारी, सुदिव्य सोनू, उमाकांत रजक, धनंजय सोरेन, योगेंद्र प्रसाद, मो. ताजुद्दीन, आलोक सोरेन, सुदीप गुड़िया और राम सूर्या मुंडा।
प्रणव झा (कांग्रेस): महागठबंधन की एकजुटता का प्रमाण
कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के पक्ष में महागठबंधन पूरी ताकत के साथ खड़ा दिखा। विशेषकर कल्पना सोरेन का प्रस्तावक बनना कांग्रेस के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
पहला सेट: कल्पना सोरेन, संजय प्रसाद यादव, सुरेश पासवान, मंगल कालिंदी, दीपक बिरूआ, निरल पूर्ति, भूषण तिर्की, सुखराम उरांव, नरेश प्रसाद सिंह और अरूप चटर्जी।
दूसरा सेट: प्रदीप यादव, डॉ. रामेश्वर उरांव, राधाकृष्ण किशोर, दीपिका पांडेय सिंह, सुरेश बैठा, भूषण बाड़ा, नमन विक्सल कोंगाड़ा, शिल्पी नेहा तिर्की, राजेश कच्छप और कुमार जयमंगल सिंह।
परिमल नाथवाणी (निर्दलीय): भाजपा का समर्थन और रणनीति
निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतरे परिमल नाथवाणी ने भी नामांकन दाखिल कर दिया है। उन्हें भाजपा और एनडीए गठबंधन का समर्थन प्राप्त है। नामांकन से पहले उन्होंने भाजपा विधायक नवीन जायसवाल के आवास पर एनडीए विधायकों के साथ बैठक की, जिससे यह स्पष्ट है कि वे भाजपा के संख्याबल के सहारे मुकाबले में बने हुए हैं।
राज्यसभा की इन दो सीटों के लिए जिस तरह के प्रस्तावक सामने आए हैं, उससे लगता है की समर्थन की लिस्ट ने गठबंधन की आंतरिक मजबूती प्रदान की हैं। अब देखना यह है कि 18 जून को होने वाले मतदान में किसका ‘गणित’ भारी पड़ता है और कौन बाजी मारता है।


















