कैरव गांधी अपहरण मामला : एक युवा का सपना, एक परिवार का सहारा... और 13 दिन से  कैद एक बेटे की जिंदगी।

कैरव गांधी अपहरण मामला : एक युवा का सपना, एक परिवार का सहारा… और 13 दिन से  कैद एक बेटे की जिंदगी।

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कैरव गांधी अपहरण मामला : एक युवा का सपना, एक परिवार का सहारा… और 13 दिन से  कैद एक बेटे की जिंदगी।

कैरव गांधी अपहरण मामला : एक युवा का सपना, एक परिवार का सहारा... और 13 दिन से  कैद एक बेटे की जिंदगी।

जमशेदपुर की सड़कों पर 13 जनवरी का वो दोपहर अब भी किसी भयानक सपने की तरह जीवित है। जब बिष्टुपुर के सीएच एरिया में दिनदहाड़े, फिल्मी अंदाज में रोकी गई गाड़ी… फर्जी नंबर प्लेट, पुलिस सायरन की आवाज, और फिर अचानक खाली हो गयी कैरव की सीट।

कैरव गांधी—24 साल का युवा पढ़ा लिखा, कारोबारी देवांग गांधी का इकलौता बेटा—अपहरणकर्ताओं के चंगुल में चला गया।उस दिन से घर में सन्नाटा पसरा है। माँ की आँखें सूजी हुई, पिता की आवाज काँपती हुई, और हर फोन की घंटी पर दिल धड़क उठता है—क्या ये वही कॉल है जो कैरव को वापस लाएगा?

कहा जाता है की फिरौती की माँग शुरू हुई 5 करोड़ से, अब बात 10 करोड़ तक पहुँच चुकी है। WhatsApp पर आए मैसेज, इंटरनेशनल नंबरों से  लेकिन कैरव की एक झलक नहीं।

पुलिस ने सीमाएँ तोड़ दीं—झारखंड से बिहार, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ तक छापेमारी। संदिग्ध स्कॉर्पियो की तलाश में नालंदा तक पहुँची टीमें, हनी ट्रैप का एंगल, अजय सिंह गिरोह की आशंका… लेकिन हर सुराग के बाद सिर्फ निराशा का नया दरवाजा खुलता है।

कैरव सिर्फ एक नाम नहीं—वो एक बेटा है, जिसकी हँसी घर की दीवारों में गूँजती थी। वो एक सपना है, जो रोज सुबह उठकर नई शुरुआत करता था। वो एक भरोसा है, जिस पर पूरा परिवार टिका हुआ था। आज वही परिवार रातों को जागकर बस यही प्रार्थना करता है—”बस सुरक्षित लौट आए, बाकी सब छोड़ देंगे।”

13 दिन बीत गए, लेकिन एक माँ की हर साँस में अभी भी उम्मीद बाकी है। एक पिता की आँखों में अभी भी वो चेहरा तैर रहा है, जो कभी कहता था—”पापा

ये अपहरण एक ऐसा  अपराध  है जो  समाज में किसी परिवार की  सुरक्षा को तार तार कर देता है । ये दर्द हर अमीर-गरीब के लिए एक जैसी  होती है ? क्या कानून की नींद अब भी इतनी गहरी है जब एक बेटे की जिंदगी दाँव पर लगी हो?

कैरव ! तुम्हारा घर अभी भी रोशनी से भरा इंतजार कर रहा है। माँ की  बस. यही पुकार है बेटा घर लौट आओ।

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