Kans flowers have begun to sway in the fields and meadows, heralding the arrival of autumn.

खेत-खलिहानों में लहराने लगे कांस के फूल, शरद ऋतु के आगमन का संदेश

Kans flowers have begun to sway in the fields and meadows, heralding the arrival of autumn.
Kans flowers have begun to sway in the fields and meadows, heralding the arrival of autumn.

शंभू कुमार सिंह 

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सिमडेगा: बारिश का मौसम ढलते ही सिमडेगा के ग्रामीण इलाकों, खेतों की मेड़ों और नदी-नालों के किनारे कांस (सावा) के सफेद फूल खिलने लगे हैं। हवा के झोंकों के साथ लहराते कांस के फूल जहां प्रकृति की सुंदरता में चार चांद लगा रहे हैं, वहीं इनके खिलने को शरद ऋतु के आगमन का संकेत भी माना जाता है।

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खेतों की हरियाली के बीच दूर तक फैली कांस के फूलों की सफेदी ग्रामीण इलाकों के प्राकृतिक सौंदर्य को मनमोहक बना रही है। बदलते मौसम और आने वाले त्योहारों की दस्तक से भी ग्रामीण कांस के फूलों को जोड़कर देखते हैं। इन दिनों युवा और प्रकृति प्रेमी भी कांस के खूबसूरत नजारों को मोबाइल कैमरों में कैद कर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं।

कांस सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह ग्रामीणों के लिए रोजगार और अतिरिक्त आमदनी का जरिया भी बनता है। इसकी सूखी डालियों का उपयोग झाड़ू बनाने में किया जाता है। ग्रामीण कांस की डालियों को एकत्र कर उनसे झाड़ू तैयार करते हैं और स्थानीय स्तर पर बिक्री कर आय अर्जित करते हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त रोजगार का सहारा मिलता है।

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कांस के फूलों का खिलना मानो प्रकृति का अपना कैलेंडर है, जो बरसात के विदा होने और शरद ऋतु के आगमन का संदेश देता है। गांवों में बिखरी कांस की सफेदी बदलते मौसम के साथ प्रकृति और ग्रामीण जीवन के खूबसूरत रिश्ते की तस्वीर पेश कर रही है।