Ramgarh illegal mining accident: Babulal Marandi levels serious allegations against the government, demands a high-level judicial inquiry.

रामगढ़ अवैध खनन हादसा: बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप, उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग

Ramgarh illegal mining accident: Babulal Marandi levels serious allegations against the government, demands a high-level judicial inquiry.
Ramgarh illegal mining accident: Babulal Marandi levels serious allegations against the government, demands a high-level judicial inquiry.

रामगढ़ जिले के अरगड्डा क्षेत्र में अवैध कोयला खनन के दौरान हुए हादसे में चार मजदूरों की मौत के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi ने घटनास्थल का दौरा कर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और उन्हें हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। इस हादसे में देवा बेदिया, डबलू बेदिया, किशोर रवानी और आशीष घटवार की मौत हो गई थी। परिजनों से मिलने के बाद मरांडी ने इस घटना को बेहद दुखद और गंभीर बताते हुए प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल उठाए।

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“हादसा नहीं, प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम” — मरांडी

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि बंद पड़ी खदानों में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी की जिम्मेदारी जिला प्रशासन और सीसीएल की थी, लेकिन इसे लेकर गंभीर लापरवाही बरती गई। उन्होंने आरोप लगाया कि बचाव कार्य में भी अनियमितताएं हुईं और पीड़ितों के साथ संवेदनहीन व्यवहार किया गया। मरांडी ने कहा कि यह घटना केवल दुर्घटना नहीं बल्कि “प्रशासनिक विफलता और भ्रष्ट व्यवस्था” का परिणाम प्रतीत होती है।

अवैध खनन और भ्रष्टाचार को लेकर सरकार पर तीखे आरोप

मरांडी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें मिली सूचनाओं के अनुसार राज्य में अवैध खनन से जुड़े कारोबार में उच्च स्तर तक हिस्सेदारी और संरक्षण का खेल चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध खनन से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा प्रभावशाली लोगों तक पहुंचता है और इस पूरे नेटवर्क में प्रशासनिक तंत्र की भी संलिप्तता की आशंका है।

“जांच नहीं तो न्याय नहीं” — न्यायिक जांच की मांग

मरांडी ने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि दोषियों पर केवल निलंबन नहीं, बल्कि हत्या जैसी गंभीर धाराओं में कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मृतक परिवारों के लिए उचित मुआवजा, सरकारी नौकरी और पुनर्वास की भी मांग की।

पीड़ित परिवारों की मांग

पीड़ित परिवारों ने बताया कि विस्थापन के कारण उनकी जमीन और रोजगार छिन गया है, जिसके चलते मजबूरी में खतरनाक परिस्थितियों में काम करना पड़ता है। परिजनों ने कोल इंडिया/सीसीएल से प्रति परिवार 10-10 लाख रुपये मुआवजा और स्थायी सहायता की मांग की है।

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