श्रीरामरेखा धाम को पर्यटन स्थल बनाए जाने के विरोध में उमड़ा सनातनी समाज, तीर्थ क्षेत्र घोषित करने की मांग


शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा : भगवान श्रीराम के वनगमन काल से जुड़े प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्रीरामरेखा धाम को पर्यटन स्थल घोषित किए जाने के विरोध में मंगलवार को सनातन समाज का बड़ा आक्रोश देखने को मिला। सिमडेगा के साथ-साथ ओडिशा और छत्तीसगढ़ से भी हजारों श्रद्धालु गांधी मैदान में जुटे और वहां से समाहरणालय तक विशाल आक्रोश मार्च निकाला।
चिलचिलाती धूप के बीच निकाले गए इस मार्च में शामिल लोगों ने श्रीरामरेखा धाम को पर्यटन क्षेत्र के बजाय “तीर्थ क्षेत्र” घोषित करने की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने झारखंड सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
आक्रोश मार्च को प्रशासन ने समाहरणालय गेट के पास रोक दिया, जिसके बाद प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्य समाहरणालय पहुंचे और पर्यटन मंत्री तथा उपायुक्त सिमडेगा के नाम संबोधित ज्ञापन एसडीओ को सौंपा।
इस दौरान विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष ने कहा कि श्रीरामरेखा धाम करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। इसे पर्यटन स्थल बनाए जाने से ऐसे लोगों का आगमन बढ़ेगा, जिनकी गतिविधियों से धार्मिक स्थल की पवित्रता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने मांग की कि अयोध्या की तर्ज पर श्रीरामरेखा धाम को भी तीर्थ क्षेत्र घोषित किया जाए।
वहीं श्रीरामरेखा धाम विकास समिति के सचिव ने कहा कि पूर्व में कार्तिक पूर्णिमा मेले को राजकीय मेला घोषित कर प्रशासनिक स्तर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद परिसर में शराब की खाली बोतलें और मांसाहार के अवशेष पाए गए, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुईं। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं धार्मिक स्थल की गरिमा के खिलाफ हैं।
सनातन समाज के लोगों ने सरकार से मांग की कि श्रीरामरेखा धाम की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखते हुए इसे पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि पवित्र तीर्थ क्षेत्र का दर्जा दिया जाए।
















