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सिमडेगा: आनंद भवन में श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन, कृष्ण-सुदामा के प्रसंग ने भक्तों को किया भावविभोर

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सिमडेगा, 8 जून]: सिमडेगा जिला मुख्यालय स्थित आनंद भवन धर्मशाला में मारवाड़ी महिला समिति के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा सोमवार को भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुई। कथा के अंतिम दिन व्यासपीठ से आचार्य वासुदेव गौतम ने सुदामा-कृष्ण मिलन का मार्मिक प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

मित्रता में नहीं होता ऊंच-नीच का भेद: आचार्य वासुदेव गौतम

कथा के अंतिम दिन आचार्य वासुदेव गौतम ने कहा कि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता निस्वार्थ प्रेम और अटूट विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि किस तरह द्वारकाधीश ने अपने मित्र सुदामा की दीन-हीन दशा देखकर उन्हें नंगे पैर दौड़कर गले लगाया और अपने आंसुओं से उनके चरण पखारे।

आचार्य ने उपस्थित भक्तों को सीख दी कि:

सच्ची मित्रता: सच्ची दोस्ती में अमीरी-गरीबी का कोई भेदभाव नहीं होता।

निस्वार्थ भक्ति: सुदामा ने द्वारका में कुछ नहीं मांगा, लेकिन प्रभु ने उनके समर्पण को देखकर बिना मांगे ही सब कुछ प्रदान कर दिया।

ईश्वर की शरण: अहंकार और स्वार्थ त्याग कर जो भी भक्त सच्चे मन से ईश्वर की शरण में आता है, प्रभु उसकी सभी पीड़ाएं हर लेते हैं।

भक्ति के जयकारों से गूंजा आनंद भवन

कथा के समापन के बाद ‘जय श्रीकृष्ण’ और ‘राधे-राधे’ के उद्घोष से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा। इसके पश्चात भव्य आरती की गई और श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।

मंगलवार को होगा यज्ञ और विशाल भंडारा

आयोजन समिति ने जानकारी दी है कि सात दिवसीय इस धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णाहुति मंगलवार को यज्ञ और विशाल भंडारे के साथ होगी। समिति की सदस्यों ने सिमडेगा के शहरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में भंडारे में शामिल होकर पुण्य का भागी बनने की अपील की है।

इस सफल आयोजन में मारवाड़ी महिला समिति की सक्रिय भूमिका रही है, साथ ही शहर के गणमान्य नागरिकों ने भी अपना पूर्ण सहयोग दिया है।

रिपोर्ट: नरेश शर्मा, सिमडेगा
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