Demand for BCI Chairman Manan Mishra's resignation

BCI में घमासान: चेयरमैन मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग, 150 करोड़ रूपये के फंड ट्रांसफर पर गंभीर सवाल

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Demand for BCI Chairman Manan Mishra's resignation

नई दिल्ली: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के भीतर विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। BCI के को-चेयरमैन और वरिष्ठ अधिवक्ता वाई.आर. सदाशिव रेड्डी ने चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। रेड्डी ने 22 अगस्त को मिश्रा को छह पन्नों का पत्र भेजकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

LiveLaw की रिपोर्ट के मुताबिक, रेड्डी ने आरोप लगाया है कि BCI के करीब 150 करोड़ रुपये के फंड को एक नए ट्रस्ट ‘BCI Trust PEARL–First’ में ट्रांसफर किया गया। उनका दावा है कि यह ट्रस्ट 17 सितंबर 2020 को पंजीकृत हुआ था और इसके ट्रस्टी चेयरमैन मनन मिश्रा द्वारा चुने गए थे। रेड्डी ने इस धन हस्तांतरण की वैधता पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि Advocates Act, 1961 में ऐसा कौन-सा प्रावधान है, जो किसी वैधानिक नियामक संस्था की राशि को उसके चेयरमैन द्वारा पंजीकृत निजी ट्रस्ट में ट्रांसफर करने की अनुमति देता है।

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लॉ कॉलेजों से ‘योगदान’ लेने का भी आरोप

रेड्डी ने पत्र में आरोप लगाया है कि BCI से मान्यता या मान्यता के नवीनीकरण के लिए संपर्क करने वाले लॉ कॉलेजों पर कथित तौर पर इसी ट्रस्ट में योगदान देने का दबाव बनाया जा रहा है। LiveLaw के अनुसार, पत्र में ऐसे कथित योगदान की राशि 25 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक बताए जाने का उल्लेख है।

रेड्डी ने सवाल उठाया है कि BCI के पास लॉ कॉलेजों की मंजूरी और नवीनीकरण की नियामक शक्ति है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल धन जुटाने के लिए नहीं किया जा सकता।

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परिवार के लोगों की नियुक्ति का आरोप

BCI में नियुक्तियों को लेकर भी रेड्डी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि काउंसिल के कर्मचारियों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिनका मनन मिश्रा से व्यक्तिगत या पारिवारिक संबंध है।

पत्र में कथित तौर पर कहा गया है कि इन नियुक्तियों के समर्थन में विज्ञापन, चयन समिति या मेरिट लिस्ट जैसे रिकॉर्ड काउंसिल के सामने नहीं रखे गए।

NALSAR छात्रों के मामले पर भी सवाल

रेड्डी ने NALSAR University of Law, Hyderabad के स्नातक छात्रों के नामांकन से जुड़े हालिया विवाद को भी इस्तीफे की मांग का आधार बनाया है।

LiveLaw के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को चेयरमैन कार्यालय से राज्य बार काउंसिलों को NALSAR के स्नातक बैच का नामांकन नहीं करने संबंधी निर्देश जारी किया गया था। रेड्डी का आरोप है कि यह निर्देश BCI की बैठक में किसी प्रस्ताव या संबंधित सामग्री को रखे बिना जारी किया गया।

बाद में इस निर्देश को वापस ले लिया गया था। रेड्डी ने इस पूरे घटनाक्रम को BCI की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया है।

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14 साल से चेयरमैन पद पर रहने पर भी उठाए सवाल

रेड्डी ने मनन मिश्रा के लंबे कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठाया है। उन्होंने कहा है कि मिश्रा 2012 से लगातार BCI चेयरमैन पद पर बने हुए हैं, जबकि पद का कार्यकाल दो साल का बताया गया है।

रेड्डी के मुताबिक, किसी निर्वाचित पद पर एक ही व्यक्ति का 14 साल तक बने रहना संस्था की लोकतांत्रिक प्रकृति पर सवाल खड़ा करता है।

विशेष बैठक और ऑडिट की मांग

रेड्डी ने इन सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए BCI की विशेष बैठक बुलाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने BCI और ‘BCI Trust PEARL–First’ दोनों के खातों का स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है।

उन्होंने यह ऑडिट ऐसी स्वतंत्र फर्म से कराने की मांग की है, जो CAG के पैनल में शामिल हो। साथ ही लॉ कॉलेजों से कथित ‘योगदान’ लेने की व्यवस्था को तत्काल रोकने की मांग भी की गई है।

15 दिन में इस्तीफा देने की मांग

रेड्डी ने मनन कुमार मिश्रा से 15 दिनों के भीतर इस्तीफा देने को कहा है। उन्होंने अपने पत्र में कहा है कि BCI के कामकाज और पेशे की प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए यह कदम जरूरी है।

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