झारखंड: टाटा स्टील को 1755 करोड़ का झटका, रामगढ़ DMO ने जारी किया भारी-भरकम डिमांड नोटिस , टाटा गयी कोयला मंत्रालय डाला Revision Application
झारखंड: टाटा स्टील को 1755 करोड़ का झटका, रामगढ़ DMO ने जारी किया भारी-भरकम डिमांड नोटिस , टाटा ने कोयला मंत्रालय दायर की Revision Application

रांची/रामगढ़: झारखंड में कोयला खनन को लेकर एक बड़ा कानूनी और प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है। रामगढ़ जिला खनन कार्यालय (DMO) ने दिग्गज औद्योगिक समूह टाटा स्टील (Tata Steel)** को करीब 1755 करोड़ का डिमांड नोटिस जारी किया है। यह नोटिस कंपनी की पश्चिम बोकारो कोलियरी में तय सीमा से अधिक खनन करने के आरोपों के बाद जारी किया गया है।
क्या है पूरा मामला?
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, टाटा स्टील पर आरोप है कि उसने वित्तीय वर्ष 2000-01 से 2006-07 के बीच अपनी पश्चिम बोकारो कोलियरी से निर्धारित सीमा से अधिक कोयले का उत्खनन किया।
अतिरिक्त खनन की मात्रा: लगभग 1.62 करोड़ मीट्रिक टन।
नोटिस की तारीख:30 मार्च 2026।
कार्रवाई का आधार: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले Common Cause vs Union of India (2014) को आधार बनाया गया है, जो अवैध और अनियंत्रित खनन पर सख्त पेनाल्टी का प्रावधान करता है।
टाटा स्टील ने आरोपों को नकारा
टाटा स्टील ने इस भारी-भरकम डिमांड नोटिस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कंपनी का कहना है कि यह नोटिस “बिना किसी ठोस आधार और औचित्य” के जारी किया गया है। कंपनी के अनुसार, उनके खनन कार्य हमेशा नियमों के दायरे में रहे हैं और विभाग के आंकड़े तथ्यों से परे हैं।
कंपनी ने इस नोटिस के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 24 अप्रैल 2026 को भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के समक्ष एक रिवीजन एप्लिकेशन (Revision Application) दायर की है। टाटा स्टील ने मांग की है कि इस नोटिस को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।
उठ रहे हैं गंभीर सवाल
दो दशक पुराने खनन मामले में अचानक हुई इस बड़ी कार्रवाई ने झारखंड के गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। जानकारों का मानना है कि इतने पुराने मामलों पर नोटिस जारी होने से राज्य की खनन निगरानी प्रणाली और डेटा प्रबंधन पर सवाल उठते हैं।
“इतने बड़े वित्तीय दावे ने न केवल औद्योगिक जगत को चौंका दिया है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि राज्य सरकार अब पुराने बकाया और खनन नियमों के उल्लंघन को लेकर बेहद सख्त रुख अपना रही है।”
अब पूरी इंडस्ट्री की नजर केंद्र सरकार और कोयला मंत्रालय के फैसले पर टिकी है। यदि टाटा स्टील को केंद्र से राहत नहीं मिलती है, तो यह मामला झारखंड हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है। इस विवाद का असर राज्य के निवेश वातावरण और अन्य माइनिंग कंपनियों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।
रिपोर्ट: दृष्टि नाउ


















