सोने का कारोबार या कागजों का खेल ? राजेश एक्सपोर्ट्स की जांच में खुला 159 अरब डॉलर का राज।

डेस्क : भारतीय शेयर बाजार की दिग्गज गोल्ड कंपनी ‘राजेश एक्सपोर्ट्स’ (Rajesh Exports – REXP.NS) इस समय एक अभूतपूर्व वित्तीय संकट और जांच के घेरे में है। बाजार नियामक संस्था ‘सेबी’ (SEBI) और ‘प्रवर्तन निदेशालय’ (ED) ने कंपनी पर वित्तीय हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस मामले में लगाए गए आरोपों का पैमाना इतना बड़ा है कि भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास में इसे सबसे चौंकाने वाली घटनाओं में से एक माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सेबी की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि राजेश एक्सपोर्ट्स ने अपनी स्विस सब्सिडियरी ‘वाल्कैम्बी’ (Valcambi) के राजस्व को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है। आरोप है कि अप्रैल 2020 से मार्च 2025 के बीच कंपनी ने अपने रिपोर्टेड रेवेन्यू को करीब 159 बिलियन (लगभग 15.15 ट्रिलियन रुपये)से अधिक दिखाया।
सेबी के मुताबिक, यह आंकड़ा कंपनी के स्टैंडअलोन अकाउंट्स में दिखाई गई कमाई (70-$100 मिलियन) से मेल नहीं खाता।
जांच एजेंसियों द्वारा लगाए गए मुख्य आरोप:
1. फर्जी रेवेन्यू और लेनदेन: सेबी का आरोप है कि कंपनी ने एक स्थानीय ब्रोकर के साथ मिलकर बिना किसी वास्तविक बैंकिंग लिंक के 114 अरब रुपये से अधिक का फर्जी कारोबार दिखाया।
2. अफ्रीकी खदानों का रहस्य: कंपनी ने भारतीय एक्सचेंजों को सूचित किया था कि उसने अफ्रीका में सोने की खदानों में 10.35 अरब रुपये का निवेश किया है। हालांकि, सेबी के फोरेंसिक ऑडिटर को इन निवेशों के समर्थन में कोई भी दस्तावेजी सबूत नहीं मिले।
3. विदेशी मुद्रा नियमों का उल्लंघन (ED की जांच): प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में कंपनी द्वारा विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के कथित उल्लंघन की बात सामने आई है। ईडी ने मुंबई और बेंगलुरु में कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान पाया कि कंपनी के पास विदेशी लेन-देन और व्यापारिक समझौतों का कोई पुख्ता रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
कंपनी का क्या है पक्ष?
आरोपों के बाद हड़कंप मचने पर राजेश एक्सपोर्ट्स ने शुक्रवार को एक एक्सचेंज स्टेटमेंट जारी किया। कंपनी ने तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे “गलतफहमी” करार दिया है। चेयरमैन राजेश मेहता ने कहा:
“रेवेन्यू के बारे में जो बातें फैलाई जा रही हैं, वे पूरी तरह गलत हैं। हमारा फाइनेंशियल डेटा एकदम सही है और हम नियामकों (Regulators) के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं।”
वहीं, वाल्कैम्बी ने इस मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
बाजार और निवेशकों पर असर
इस घटना का असर कंपनी के शेयरों पर तुरंत दिखा और खबर सार्वजनिक होने के बाद से राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में 10% की भारी गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों के लिए चिंता का विषय यह भी है कि सरकारी बीमा कंपनी ‘LIC’ की इस कंपनी में 11% की बड़ी हिस्सेदारी है। हालांकि, LIC की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राजेश एक्सपोर्ट्स का मामला अब एक जटिल कानूनी और वित्तीय जांच का विषय बन चुका है। फॉरेंसिक ऑडिट में दस्तावेजों की कमी और रेवेन्यू के आंकड़ों में भारी विसंगति ने निवेशकों के भरोसे को डगमगा दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में नियामक संस्थाएं क्या कदम उठाती हैं और कंपनी अपने दावों को साबित करने के लिए क्या साक्ष्य पेश करती है।
LIC का एंगल और आम आदमी
हालांकि इस कंपनी में LIC की इसमें 11% हिस्सेदारी है, तो आम लोग चिंतित हैं क्योंकि LIC में भारत के करोड़ों आम लोगों का पैसा जमा है।
जानकार बताते है अगर राजेश एक्सपोर्ट्स का मामला बहुत गंभीर निकलता है और कंपनी की वित्तीय स्थिति बिगड़ती है, तो LIC के निवेश की वैल्यू कम हो सकती है। हालांकि LIC एक बहुत बड़ी संस्था है, उसका पैसा हजारों कंपनियों में फैला हुआ है। एक कंपनी के घाटे से LIC के पूरे कामकाज पर असर पड़ना मुश्किल है, लेकिन यह सरकारी संस्थान की जवाबदेही पर सवाल जरूर उठाता है।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट रॉयटर्स द्वारा प्राप्त जानकारी और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों पर आधारित है।
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