Babulal Marandi attacked the government over the dumping of government medicines in Manika, saying patients were craving for medicines, and the medicines were scattered on the road.

मनिका में सरकारी दवाइयां फेंके जाने पर बाबूलाल मरांडी का सरकार पर हमला, कहा- मरीज दवा को तरस रहे, दवाइयां सड़क पर बिखरीं

Babulal Marandi attacked the government over the dumping of government medicines in Manika, saying patients were craving for medicines, and the medicines were scattered on the road.
Babulal Marandi attacked the government over the dumping of government medicines in Manika, saying patients were craving for medicines, and the medicines were scattered on the road.

रांची: नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने लातेहार जिले के मनिका थाना क्षेत्र में सरकारी दवाइयों के जंगल में फेंके जाने की घटना को लेकर राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह घटना झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर करती है और सरकार की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करती है।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

मरांडी ने कहा कि मनिका थाना और दो मुहान नदी के बीच जंगल में सरकारी दवाइयों का फेंका जाना केवल दवाइयों की बर्बादी नहीं है, बल्कि गरीब मरीजों के इलाज के अधिकार, जनता के टैक्स के पैसे और सरकारी जिम्मेदारी का खुलेआम अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ओर राज्य के गरीब मरीज अस्पतालों में दवाओं के लिए भटक रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लाखों रुपये की सरकारी दवाइयां सड़क किनारे फेंकी जा रही हैं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बाबूलाल मरांडी ने स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान के बजाय स्वास्थ्य मंत्री सोशल मीडिया पर रील बनाने, कैमरे के सामने बयान देने और आलोचकों को मुकदमे व केस की धमकी देने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं।

मरांडी ने कहा कि राज्य के अस्पतालों में कहीं डॉक्टरों की कमी है, कहीं बेड उपलब्ध नहीं हैं और कई जगहों पर जांच सुविधाओं का अभाव है। ऐसे हालात में सरकारी दवाइयों का इस तरह फेंका जाना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मरीज दवा के अभाव में परेशान थे, तब ये दवाइयां सड़क तक कैसे पहुंचीं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी जनता, पत्रकार, विपक्ष या सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की विफलताओं पर सवाल उठाए जाते हैं, तो जवाब देने के बजाय केस और मुकदमों की धमकी देकर लोगों को चुप कराने की कोशिश की जाती है। उन्होंने पूछा कि क्या लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध है और क्या जनता अपने टैक्स के पैसे का हिसाब भी नहीं मांग सकती।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि केवल रील बनाने और बयानबाजी करने से स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं सुधरती और न ही मरीजों का इलाज होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जवाब मांगते हुए कहा कि आखिर कब तक गरीबों की जिंदगी, जनता के पैसे और स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ इस तरह का खिलवाड़ होता रहेगा।

मरांडी ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो यह जनता के विश्वास और सरकारी व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा।

नई और ताज़ा खबरों के लिए जुड़े रहें — Drishti Now