JPSC Chairman L. Khiangte resigns.

JPSC चेयरमैन एल. ख्यांगते इस्तीफा: क्या अब फिर लटक जाएंगी परीक्षाएं? राज्य के लाखों युवाओं की बढ़ी धड़कनें

JPSC Chairman L. Khiangte resigns.

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झारखंड के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में इस वक्त एक बड़ी खबर ने हलचल मचा दी है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्य सचिव एल. ख्यांगते ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सीधे राजभवन पहुंचकर राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंप दिया है।

इस नाटकीय घटनाक्रम के बाद से राज्य में चर्चाओं का बाजार गर्म है, क्योंकि इस अचानक इस्तीफे के पीछे की असली वजह क्या है, इसे लेकर अभी तक सरकार या आयोग की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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CID के दौरे की चर्चा से गरमाई सियासत

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया यह बात सामने आई कि इस्तीफा देने से ठीक  पहले सीआईडी (CID) की एक टीम एल. ख्यांगते के आवास पर पहुंची थी।

हालांकि, इस बात की आधिकारिक पुष्टि किसी ने नहीं की है कि सीआईडी के वहां जाने का उनके इस्तीफे से कोई सीधा नाता है या नहीं। लेकिन इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात और उसके तुरंत बाद आए इस्तीफे ने राजनीतिक और प्रशासनिक हल्कों में कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं।

Jpsc controversy

JPSC: परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों के बीच जेपीएससी चेयरमैन एल. खियांग्ते का इस्तीफे की खबर

राजभवन की नाराजगी भी रही सुर्खियों में

चर्चा यह भी है कि हाल ही में JPSC द्वारा आयोजित कुछ परीक्षाओं के प्रश्नपत्रों और आंसर की में सामने आई गंभीर गड़बड़ियों को लेकर राजभवन ने काफी सख्त रुख अपनाया था। राज्यपाल की तरफ से जेपीएससी अध्यक्ष को पत्र लिखकर इन मामलों में जांच और सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, जिसके बाद से ही प्रशासनिक हलकों में सुगबुगाहट तेज हो गई थी।

फरवरी में संभाली थी कमान, अब क्या फिर लटकेंगी परीक्षाएं?

बता दें कि 1988 बैच के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी एल. ख्यांगते ने इसी साल फरवरी में JPSC के अध्यक्ष पद की कमान संभाली थी। मुख्य सचिव रह चुके ख्यांगते ने कार्यभार संभालते ही वर्षों से पेंडिंग पड़ी भर्तियों और रुकी हुई परीक्षाओं की रफ्तार तेज करने की कोशिश की थी।

लेकिन उनके इस तरह अचानक बाहर होने से आयोग में एक बार फिर खालीपन आ गया है। इस समय जेपीएससी की कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं और इंटरव्यू प्रक्रियाएं लाइन में हैं।लाखों युवाओं के मन में बड़ा सवाल: अध्यक्ष के यूं अचानक जाने से क्या एक बार फिर से पूरा सिस्टम सुस्त पड़ जाएगा और परीक्षाएं लंबी खिंचेंगी?

फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस असमंजस की स्थिति को खत्म करने के लिए कितनी जल्दी नए अध्यक्ष की नियुक्ति करती है, ताकि अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में न लटके।

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