14वीं JPSC प्रिलिम्स परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर याचिका पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

नवीन कुमार
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा एक बार फिर कानूनी कार्यवाही में घिरती नजर आ रही है। परीक्षा प्रक्रिया और इसके परिणामों में कथित गड़बड़ियों का हवाला देते हुए झारखंड हाईकोर्ट में एक रिट याचिका दाखिल की गई है, जिसमें पूरी प्रिलिम्स परीक्षा को ही सिरे से खारिज करने की मांग की गई है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब न्याय के मंदिर से बड़े फैसले की उम्मीद जताई जा रही है।
याचिका में उठाए गए मुख्य और गंभीर सवाल
प्रार्थी राजेश प्रसाद की ओर से दायर इस याचिका में आयोग की कार्यप्रणाली पर कई तीखे सवाल खड़े किए गए हैं:
परीक्षा रद्द करने की मांग: प्रार्थी का मुख्य तर्क है कि परीक्षा के दौरान नियमों की अनदेखी हुई है, इसलिए पूरी प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर दिया जाना चाहिए।
कट-ऑफ और ओएमआर शीट का मुद्दा: याचिका में यह बात प्रमुखता से रखी गई है कि आयोग ने ना तो पारदर्शी तरीके से कट-ऑफ मार्क्स (Cut-off marks) सार्वजनिक किए और ना ही ओएमआर शीट (OMR sheet) को नियमानुसार अपलोड किया गया।
अधिकारियों के हस्ताक्षर गायब: रिजल्ट और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दौरान सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर छूटने जैसी गंभीर प्रक्रियागत चूक का मामला भी उठाया गया है।
बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों का चयन: याचिका में उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुल 418 अभ्यर्थियों के चयन पर भी गहरी आपत्ति जताई गई है, जिससे स्थानीय युवाओं में रोष है।
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हाईकोर्ट में अब आगे क्या?
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट की न्यायूर्ति जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत में सुनवाई चल रही है।
अदालत ने इस विवाद की नज़ाकत को समझते हुए विस्तृत और गहन सुनवाई के लिए अगली तारीख गुरुवार मुकर्रर की है। बहरहाल, इस मामले की अगली सुनवाई के बाद अदालत के रुख पर राज्य के हजारों अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हुई हैं।















