From mining to JPSC-JSSC, Babulal Marandi cornered the government; demanded an account of outstanding dues worth ₹132 crore.

JPSC-JSSC परीक्षा विवाद पर बाबूलाल मरांडी का सरकार पर हमला, पूछा- JSSC के प्रभारी अध्यक्ष पर कार्रवाई क्यों नहीं?

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रांची: झारखंड में JPSC और JSSC की परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया x के  पोस्ट के जरिए पूछा कि जब अनियमितता के आधार पर JPSC के चेयरमैन की गिरफ्तारी हो चुकी है, तो JSSC के प्रभारी अध्यक्ष प्रशांत कुमार के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

मरांडी ने कहा कि विभिन्न परीक्षाओं को रद्द करने की अधिसूचना जारी हो चुकी है और उसमें CID की जांच में अनियमितता पाए जाने का उल्लेख किया गया है। ऐसे में उन्होंने सरकार से पूछा कि कार्रवाई का मापदंड सभी के लिए एक जैसा क्यों नहीं है।

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JPSC की 11वीं-13वीं परीक्षा को लेकर भी उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी ने JPSC की 11वीं-13वीं परीक्षा के इंटरव्यू को लेकर सामने आए आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि परीक्षा में इंटरव्यू बोर्ड को कथित तौर पर मैनेज करने की बात जांच के दौरान सामने आई है। अभ्यर्थियों से वसूली के मामले में तत्कालीन JPSC सदस्य की PA से जुड़े व्यक्ति की गिरफ्तारी का भी उन्होंने उल्लेख किया।

मरांडी ने यह भी कहा कि जांच के दौरान इंटरव्यू के लिए अभ्यर्थियों को कथित तौर पर चयनित बोर्ड में बुलाए जाने को लेकर गंभीर दावे सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया से ही होगी।

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इंटरव्यू बोर्ड में शामिल अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

भाजपा नेता ने इंटरव्यू बोर्ड में शामिल रहे वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि जांच में इंटरव्यू प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है, तो बोर्ड में शामिल सभी अधिकारियों के बयान दर्ज किए जाने चाहिए और उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

मरांडी ने सवाल उठाया कि यदि जांच से जुड़े अधिकारियों की भूमिका को लेकर ही आरोप लगाए जा रहे हैं, तो ऐसी स्थिति में मामले की निष्पक्ष जांच कैसे सुनिश्चित होगी।

CBI जांच की मांग

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे मामले की जांच CBI को सौंपने की मांग की है। उनका कहना है कि परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और नियुक्तियों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष एवं विश्वसनीय जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि इंटरव्यू प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है, तो इसकी पूरी तह तक जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

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