झारखंड मुक्ति मोर्चा का चुनाव आयोग के खिलाफ आक्रोश, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया रद्द करने की मांग

रांची: विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा का गुस्सा बुधवार को राजधानी की सड़कों पर साफ दिख गया। पार्टी के नेताओं और हजारों कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कार्यकर्ताओं ने लोक भवन का घेराव करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोका।

प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि एसआईआर प्रक्रिया आम मतदाताओं को परेशान कर रही है और इसका राजनीतिक दुरुपयोग हो रहा है। पार्टी ने साफ कर दिया कि यह आंदोलन सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं रहेगा।

केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर देशद्रोह का मुकदमा चलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि पार्टी का यह आंदोलन सड़कों तक ही नहीं रुकेगा। इंडिया ब्लॉक का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राष्ट्रपति से मुलाकात करेगा। अगर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो संसद के शीतकालीन सत्र में महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा।

राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने एसआईआर प्रक्रिया को जनता के अधिकारों पर सीधा हमला बताया। उनका कहना था कि इस जटिल प्रक्रिया के कारण आम नागरिकों को अपनी पहचान साबित करने के लिए अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ रही है। इससे मतदाताओं के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है।

विधायक विकास मुंडा ने आरोप लगाया कि एसआईआर का इस्तेमाल सोची-समझी रणनीति के तहत कुछ खास राजनीतिक दलों को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने निष्पक्ष जांच और कानूनी कार्रवाई की मांग की। विधायक अमित महतो ने पूरी एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता के हक की यह लड़ाई अब सड़क से लेकर सदन तक आक्रामक रूप से लड़ी जाएगी।

प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ता नारेबाजी करते रहे और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते रहे। पुलिस की भारी तैनाती के बावजूद प्रदर्शन काफी समय तक चला। झारखंड मुक्ति मोर्चा का रुख साफ है कि अगर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार ने इस मामले में संज्ञान नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन का काम पारदर्शी और आसान होना चाहिए, न कि आम लोगों को परेशान करने वाला। रांची के इस प्रदर्शन ने साफ संकेत दे दिया है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है।

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