ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश से इनकार, निर्वाचन आयोग से मांगा जवाब
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को तत्काल निलंबित करने या उनके कामकाज पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों समेत संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए।

मीडिया रिपोर्ट के आधार पर आदेश नहीं दे सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह केवल मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ तत्काल कार्रवाई का आदेश नहीं दे सकता। अदालत पहले निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों का जवाब तथा मूल रिकॉर्ड देखना चाहती है।
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि निर्वाचन आयोग का जवाब और रिकॉर्ड देखने के बाद यह सामने आता है कि कुछ फैसले निर्धारित प्रक्रिया या आवश्यक सहमति के बिना लिए गए थे, तो उन फैसलों पर दोबारा विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में संबंधित फैसलों को वापस लेने की कार्रवाई भी संभव है।

SIR से जुड़े 14 फैसलों पर उठे सवाल
याचिका में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े करीब 14 महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर चुनाव आयुक्तों की ओर से आपत्तियां दर्ज की गई थीं। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इन फैसलों में निर्वाचन आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
याचिका में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी से संबंधित लिखित आपत्तियों तथा मीडिया रिपोर्टों का भी हवाला दिया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी नहीं हुआ है।

फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर भी सवाल
मामले में मतदाता सूची से जुड़े फॉर्म-6 में कथित बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता यह जानना चाहते हैं कि फॉर्म-6 में बदलाव किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत किए गए। इसके अलावा SIR के दौरान मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और दोबारा बहाल करने की प्रक्रिया तथा निर्वाचन आयोग की डिजिटल व्यवस्था को लेकर भी याचिका में सवाल उठाए गए हैं।
कोर्ट ने कहा- पहले रिकॉर्ड सामने आए
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि मामले में आरोपों की जांच के लिए पहले संबंधित पक्षों का जवाब और रिकॉर्ड सामने आना जरूरी है। अदालत ने तत्काल किसी संवैधानिक पदाधिकारी को काम करने से रोकने के बजाय न्यायिक जांच की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता चुना है।इसका अर्थ यह नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त को आरोपों से मुक्त कर दिया है। फिलहाल अदालत ने केवल अंतरिम राहत देने से इनकार किया है। आगे की कार्रवाई निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार के जवाब तथा अदालत के सामने पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड पर निर्भर करेगी।
अब आगे क्या होगा?
निर्वाचन आयोग और अन्य प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट यह देख सकता है कि SIR से जुड़े जिन फैसलों को चुनौती दी गई है, वे निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रणाली के अनुरूप लिए गए थे या नहीं। यदि रिकॉर्ड से यह साबित होता है कि किसी निर्णय में अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ, तो अदालत उस फैसले पर उचित आदेश दे सकती है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का रुख यही है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल हटाने या निलंबित करने के बजाय पहले आरोपों की तथ्यात्मक और कानूनी जांच के लिए संबंधित पक्षों का जवाब लिया जाए।

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