पुलिस कार्रवाई पर अमीषा प्रसाद के गंभीर आरोप, JPSC-JSSC Reform मंच ने की CBI जांच की मांग

रांची: JPSC-JSSC Reform मंच की आंदोलनकारी छात्रा अमीषा प्रसाद ने पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। रांची में बुधवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में अमीषा प्रसाद ने कहा कि उन्हें बिना किसी नोटिस के उनके घर से थाने लाया गया और करीब सात घंटे तक थाने में रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब दो महीने पुराने अस्पताल से जुड़े एक मामले में पूछताछ के नाम पर पुलिस ने यह कार्रवाई की।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!अमीषा प्रसाद ने दावा किया कि विपक्ष के दबाव में पुलिस ने उनके खिलाफ कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि JPSC-JSSC आंदोलन के दौरान पुलिस की ओर से पहले बताया गया था कि उनके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है, लेकिन अगले ही दिन उनके खिलाफ केस दर्ज कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पहले कोई मामला नहीं था तो अगले दिन केस कैसे दर्ज हो गया। अमीषा ने यह भी कहा कि एक अज्ञात व्यक्ति की शिकायत के आधार पर भी उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

उन्होंने कहा कि पुलिस उन्हें छात्रा के बजाय फाउंडेशन की सदस्य बता रही है। अमीषा ने सवाल उठाया कि यदि वह पढ़ाई नहीं कर रही हैं तो क्या उन्हें JPSC-JSSC आंदोलन का समर्थन करने का अधिकार नहीं है। अस्पताल से जुड़े मामले पर उन्होंने किसी भी तरह की तोड़फोड़ से इनकार करते हुए कहा कि पुलिस चाहे तो सीसीटीवी फुटेज की जांच कर सकती है।
अमीषा ने पुतला दहन के दिन अपने साथ कथित कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया और सवाल किया कि उस मामले में पुलिस की ओर से अब तक स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति या व्यक्तिगत मुद्दे को लेकर नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकार और JPSC-JSSC परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर है।

वहीं, मंच के आंदोलनकारी छात्र राधे कुमार ने सरकार और प्रशासन पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि झारखंड के 24 जिलों में छात्रों और कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई है। उन्होंने कई स्थानों पर छात्रों पर लाठीचार्ज किए जाने का भी आरोप लगाया।
राधे कुमार ने कहा कि JPSC-JSSC Reform मंच का आंदोलन शांतिपूर्ण रहा है। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 26 दिनों तक चले आंदोलन के दौरान भी छात्रों ने किसी तरह की तोड़फोड़ नहीं की। उन्होंने कहा कि यदि कार्यकर्ता पुलिस की तरह कार्रवाई कर रहे हैं और छात्रों के साथ कथित तौर पर बर्बरता हो रही है तो सरकार को प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।

राधे कुमार ने मुख्यमंत्री से छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और कथित परीक्षा अनियमितताओं की CBI जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि पहले CID की ओर से पेपर लीक नहीं होने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में पेपर लीक से जुड़े मामलों में कार्रवाई की खबरें सामने आईं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पहले क्लीन चिट दी गई थी तो बाद में पेपर लीक से जुड़े मामले सामने कैसे आए।
राधे कुमार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि जांच CID के बजाय CBI से कराई जानी चाहिए, ताकि परीक्षा व्यवस्था से जुड़े आरोपों की सच्चाई सामने आ सके।
















