Odisha News, Keonjhar Skeleton Case

ओडिशा: सिस्टम की संवेदनशीलता शर्मसार, बैंक से पैसे निकालने के लिए बहन का कंकाल कंधे पर लादकर पहुँचा भाई

Author Drishti Now | Edited by Drishti Now
Updated: Tue, 28 Apr 2026 09:11 AM (IST)

ओडिशा: सिस्टम की संवेदनशीलता शर्मसार, बैंक से पैसे निकालने के लिए बहन का कंकाल कंधे पर लादकर पहुँचा भाई

Odisha News, Keonjhar Skeleton Case

केंदुझर (ओडिशा): आधुनिक भारत और डिजिटल बैंकिंग के दावों के बीच ओडिशा के केंदुझर जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। एक गरीब आदिवासी व्यक्ति को अपनी मृत बहन के बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए उसका कंकाल कब्र से निकालकर कंधे पर लादना पड़ा और 3 किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुँचना पड़ा।

क्या है पूरा मामला?

दियानाली गांव के रहने वाले  जीतू मुंडा (50)  की बड़ी बहन कालरा मुंडा की मृत्यु 26 जनवरी 2026 को बीमारी के कारण हो गई थी। कालरा ने कड़ी मेहनत और गाय-बैल बेचकर ओडिशा ग्रामीण बैंक (मल्लीपासी शाखा) में लगभग 20,000 रुपये जमा किए थे।
जीतू को घर चलाने और कर्ज चुकाने के लिए इन पैसों की सख्त जरूरत थी। लेकिन जीतू के पास न तो बहन का मृत्यु प्रमाण पत्र था और न ही बैंक खाते में कोई नॉमिनी (नामांकित व्यक्ति) दर्ज था।

बैंक ने कहा- खाताधारक को लेकर आओ

जीतू का आरोप है कि उसने कई बार बैंक के चक्कर काटे और कर्मचारियों को बहन की मौत की जानकारी दी। लेकिन बैंक कर्मियों ने नियमों का हवाला देते हुए बार-बार कहा, “पैसे चाहिए तो खाताधारक को साथ लेकर आओ।”बेबस और अनपढ़ जीतू को जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो उसने सोमवार (27 अप्रैल) को गांव के श्मशान से बहन की लाश को कब्र खोदकर निकाला। उसने कंकाल को एक पॉलिथीन और कपड़ों में लपेटा और तपती धूप में 3 किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुंच गया।

बैंक में मची अफरा-तफरी

जैसे ही जीतू कंकाल लेकर बैंक परिसर में दाखिल हुआ, वहां मौजूद कर्मचारियों और ग्राहकों के बीच चीख-पुकार और भगदड़ मच गई। सूचना मिलते ही पटना पुलिस स्टेशन के प्रभारी  किरण प्रसाद साहू  पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासन ने हस्तक्षेप करते हुए कंकाल को वापस सम्मानजनक तरीके से दफनाने की व्यवस्था की।

प्रशासनिक कार्रवाई और आश्वासन

घटना के बाद प्रशासन ने माना कि बैंक अधिकारियों ने जीतू को सही प्रक्रिया नहीं समझाई।
पुलिस का बयान: बैंक को निर्देश दिए गए हैं कि जीतू को मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने में मदद करें और कानूनी वारिस होने के नाते जल्द से जल्द भुगतान सुनिश्चित करें।”

विशेषज्ञों की राय:  जानकारों का कहना है कि कम राशि (जैसे 20,000 रुपये) के मामले में बैंक ‘इंडेम्निटी बॉन्ड’ के जरिए भुगतान कर सकते थे, लेकिन संवेदनशीलता की कमी के कारण यह नौबत आई।

डेस्क दृष्टि नाउ

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