रांची: डीएवी कडरू के पूर्व प्रिंसिपल एमके सिन्हा दोषी करार, नर्स के साथ छेड़छाड़ मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला

रांची: डीएवी कडरू के पूर्व प्रिंसिपल एमके सिन्हा दोषी करार, नर्स के साथ छेड़छाड़ मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला

रांची: डीएवी कडरू के पूर्व प्रिंसिपल एमके सिन्हा दोषी करार, नर्स के साथ छेड़छाड़ मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची के सिविल कोर्ट ने गुरुवार को एक बेहद संवेदनशील और बहुचर्चित मामले में अपना फैसला सुना दिया है। अपर न्यायायुक्त अरविंद कुमार की अदालत ने डीएवी स्कूल, कपिलदेव के पूर्व प्रिंसिपल एमके सिन्हा को दोषी करार दिया है। इस फैसले ने स्कूल प्रबंधन और शैक्षणिक जगत में हड़कंप मचा दिया है। दोषी को सजा के बिंदुओं पर कल (शुक्रवार) सुनवाई की जाएगी।

क्या था पूरा मामला?

यह घटना मई 2022 की है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया था। स्कूल में कार्यरत एक महिला स्टाफ नर्स ने प्रिंसिपल एमके सिन्हा के खिलाफ अरगोड़ा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पीड़िता ने आरोप लगाया था कि प्रिंसिपल ने उन्हें बीपी (BP) चेक करने के बहाने अपने कक्ष (चेंबर) में बुलाया था, जहाँ उन्होंने पीड़िता के साथ अश्लील हरकतें कीं। साथ ही, उन पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया गया।

जेल और जमानत का लंबा कानूनी सफर

इस मामले के सामने आते ही प्रिंसिपल एमके सिन्हा फरार हो गए थे। पुलिस ने उन्हें करीब चार दिनों की मशक्कत के बाद जमशेदपुर के टेल्को थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। इसके बाद से ही यह मामला कानूनी पेंच में फंसा रहा:

जमानत : 21 नवंबर 2022 को झारखंड हाईकोर्ट ने एमके सिन्हा को जमानत दे दी थी।

जमानत : 21 नवंबर 2022 को झारखंड हाईकोर्ट ने एमके सिन्हा को जमानत दे दी थी।

जमानत रद्द :पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जमानत रद्द करने की मांग की। लंबी सुनवाई के बाद 20 जून 2025 को हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत रद्द कर दी।

सुप्रीम कोर्ट का रुख: हाईकोर्ट के इस आदेश को एमके सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और उन्हें तुरंत सरेंडर करने का आदेश दिया।

वर्तमान स्थिति: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने निचली अदालत में सरेंडर किया, जिसके बाद से वे न्यायिक हिरासत में हैं।

पीड़िता को न्याय की उम्मीद

इस मामले को लेकर महिला सुरक्षा और कार्यस्थल पर उत्पीड़न (Workplace Harassment) को लेकर बहस फिर से तेज हो गई है। पीड़िता के वकील और परिजनों ने इस फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि दोषी को सख्त से सख्त सजा मिलेगी।

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