झारखंड में नक्सल मोर्चे पर बड़ी सफलता: मिसिर बेसरा दस्ते के 24 नक्सल कल करेंगे सरेंडर, कई इनामी शामिल

रांची: झारखंड के नक्सल मोर्चे से एक बेहद अहम और बड़ी खबर सामने आ रही है। सुरक्षाबलों के लगातार कड़े अभियानों के बीच सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट के जंगलों में सक्रिय एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा के दस्ते से जुड़े करीब 24 नक्सली कल यानी 28 जुलाई को झारखंड पुलिस मुख्यालय में सामूहिक आत्मसमर्पण करेंगे।

सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक, संभावित आत्मसमर्पण करने वालों में दिलीप महतो, चंदन लोहरा, जयकांत और संतोष माँझी जैसे कई वरिष्ठ और खूंखार माओवादी कमांडर भी शामिल हैं। हालांकि, झारखंड पुलिस ने कल एक प्रेस कांन्फ्रेंस बुलाया है, पुलिस मुख्यालय में सरेंडर को लेकर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
क्यों छोड़ रहे हैं हिंसा का रास्ता?
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट के जंगलों में सुरक्षाबलों द्वारा लगातार आक्रामक अभियान चलाए जा रहे हैं। इन ऑपरेशनों के चलते नक्सलियों के सुरक्षित ठिकाने पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं, हथियारों की आपूर्ति बाधित हुई है और संगठन के भीतर लगातार आंतरिक टूट देखने को मिल रही है। इन्हीं सब वजहों से कई वरिष्ठ कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का बड़ा फैसला किया है।
हाल के महीनों में नक्सल संगठनों को बड़े झटके
झारखंड में चलाए जा रहे नक्सल विरोधी अभियानों से माओवादी संगठन की कमर टूट चुकी है। हालिया आंकड़ों और बड़ी कार्रवाइयों पर नजर डालें तो:
21 मई 2026: सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट क्षेत्र के 25 नक्सलियों ने रांची में सामूहिक आत्मसमर्पण किया था, जिसे राज्य में नक्सल उन्मूलन अभियान की एक बड़ी उपलब्धि माना गया था।
जनवरी 2026: सुरक्षाबलों ने सारंडा के जंगलों में एक बड़े अभियान के दौरान मुठभेड़ में 1 करोड़ रुपये के इनामी नक्सली अनल उर्फ प्रतिराम माझी समेत करीब 19 नक्सलियों को ढेर कर दिया था।
इन लगातार सफल अभियानों के बाद से झारखंड के ‘रेड कॉरिडोर’ में नक्सलियों की पकड़ लगातार कमजोर पड़ती जा रही है, और अब यह सामूहिक आत्मसमर्पण इस मोर्चे पर एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

















