सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई म्यूट होने पर CJI को चिट्ठी, केस की लिस्टिंग पर भी उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट में नोएडा की तत्कालीन जिलाधिकारी मेधा रूपम से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान वर्चुअल सुनवाई की आवाज म्यूट किए जाने और मामले की लिस्टिंग को लेकर सवाल उठे हैं। Lawyers Association for Constitution (LAFC) ने इस संबंध में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। LAFC ने अपने पत्र में सुप्रीम कोर्ट में मामलों की लिस्टिंग और रोस्टर व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि सामान्य रोस्टर के अनुसार यह मामला जिस पीठ के सामने सूचीबद्ध हुआ, वह इस तरह के मामले की सुनवाई करने वाली नियमित पीठ नहीं थी।
पत्र में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों के लिए लागू रोस्टर व्यवस्था के अनुसार यह मामला संबंधित पीठ के सामने नहीं आता। संगठन ने दावा किया कि ऐसा प्रतीत होता है कि मामले को विशेष रूप से एक विशेष पीठ को सौंपा गया।

सुनवाई की आवाज म्यूट होने पर भी सवाल
LAFC ने सुनवाई के दौरान वर्चुअल कोर्ट की ऑडियो फीड म्यूट किए जाने का मुद्दा भी उठाया है। संगठन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही को देखने और सुनने के लिए उपलब्ध वर्चुअल सुविधा पारदर्शिता और न्यायिक कार्यवाही तक सार्वजनिक पहुंच का महत्वपूर्ण माध्यम है। संगठन ने CJI से इस संबंध में स्पष्टीकरण और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?
यह मामला नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिए जाने से जुड़ा है। आकृति चौधरी की हिरासत को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अधिकारियों के खिलाफ कड़ी टिप्पणियां की थीं और मुआवजे का निर्देश दिया था। इसके बाद नोएडा की तत्कालीन जिलाधिकारी मेधा रूपम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई। 23 सितंबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश के कुछ हिस्सों पर अंतरिम रोक लगाई थी। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को होनी है।

CJI को पत्र में क्या कहा गया?
LAFC ने अपने पत्र में मुख्य रूप से दो मुद्दे उठाए हैं—
– मामले की रोस्टर से अलग तरीके से लिस्टिंग किए जाने पर सवाल। सुनवाई के दौरान वर्चुअल कोर्ट की ऑडियो फीड म्यूट किए जाने पर आपत्ति। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि याचिकाकर्ता मेधा रूपम भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं। संगठन ने इस तथ्य के संदर्भ में मामले की लिस्टिंग को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठाया है।

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