पटना पुलिस एग्जाम : पाटलिपुत्र स्टेशन पर भगदड़ और हंगामा
पटना, 14 जून – बिहार पुलिस एग्जाम यानी सिपाही भर्ती परीक्षा (Prohibition Constable Recruitment Exam) के पहले दिन ही पटना के पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन पर भारी अफरा-तफरी और भगदड़ मच गई। हजारों अभ्यर्थी परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के लिए ट्रेनों की कमी और देरी से नाराज हो गए, जिसने रेलवे ट्रैक ब्लॉक करने, पथराव और तोड़फोड़ तक का रूप ले लिया।
क्या था पूरा माजरा?
बिहार में मद्य निषेध सिपाही (Prohibition Constable) के लगभग 4236 पदों पर परीक्षा रविवार (14 जून 2026) को दो पालियों में 38 जिलों में आयोजित हो रही थी। अभ्यर्थी देर रात से ही स्टेशन पहुंचने लगे थे, क्योंकि उन्हें परीक्षा केंद्रों (ज्यादातर दूर-दराज के इलाकों) तक पहुंचना था।
ट्रेनों की कमी और देरी:
स्पेशल ट्रेनें चलाई गई थीं, लेकिन अभ्यर्थियों की भारी भीड़ के मुकाबले पर्याप्त नहीं थीं। कई ट्रेनें लेट पहुंचीं या ओवरक्राउडेड हो गईं। कुछ अभ्यर्थी ट्रेन पकड़ने में असफल रहे और परीक्षा मिस करने का डर सताने लगा।
भगदड़ और विरोध:
आधी रात के आसपास सैकड़ों-हजारों अभ्यर्थियों ने ट्रैक पर उतरकर ट्रेनों को रोका। इमरजेंसी चेन खींची गई, ट्रेनों को ब्लॉक किया गया। माहौल गर्म होने पर कुछ असामाजिक तत्वों ने पथराव शुरू कर दिया, ट्रेन के डिब्बों और स्टेशन की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। दुकानों और रेलवे प्रॉपर्टी को तोड़ा गया।
पुलिस की कार्रवाई और नतीजास्थिति बिगड़ने पर भारी पुलिस फोर्स, आरपीएफ और जीआरपी मौके पर पहुंची। लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले और हवाई फायरिंग की गई।
रेल आईजी समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।
अधिकारियों ने कहा कि 150-200 असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ा, जबकि ज्यादातर अभ्यर्थी सिर्फ परीक्षा देने जा रहे थे। कुछ अभ्यर्थियों को रोका भी गया।
अंत में स्थिति काबू में आई, ट्रेनें फिर से चलने लगीं और कई अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र पहुंच सके। हालांकि, कई उम्मीदवार परीक्षा मिस कर बैठे, खासकर वे जिनकी उम्र सीमा लगभग खत्म हो रही थी।अभ्यर्थियों की नाराजगी का कारणअभ्यर्थी सालों से तैयारी कर रहे थे। एक उम्मीदवार महेंद्र कुमार जैसे कई लोग कह रहे थे – “इतनी मेहनत के बाद अगर ट्रेन न मिले तो क्या होगा?” दूर के जिलों से आने वाले छात्रों के लिए ट्रांसपोर्ट की बेहतर व्यवस्था की मांग लंबे समय से थी, लेकिन इस बार भी कमी महसूस की गई।
प्रशासन का पक्ष
पटना डीएम और रेल अधिकारियों ने कहा कि स्पेशल ट्रेनें उपलब्ध थीं, लेकिन कुछ लोगों ने जानबूझकर बाधा डाली। अब जांच चल रही है और सामान्य रेल परिचालन बहाल हो गया है।
क्या सबक मिला?
यह घटना बिहार पुलिस भर्ती जैसी बड़ी परीक्षाओं में रेलवे और प्रशासन की बेहतर कोऑर्डिनेशन की जरूरत को रेखांकित करती है। लाखों युवा सरकारी नौकरी के सपने देखते हैं, लेकिन छोटी-सी लापरवाही उनके भविष्य पर असर डाल सकती है।अभ्यर्थियों से अपील: शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करें, हिंसा से कोई फायदा नहीं।
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