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रक्तदान की मिसाल बना सिमडेगा, चार दशक से जारी है सेवा का सिलसिला

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सिमडेगा में रक्तदान केवल जरूरत के समय की मदद नहीं, बल्कि चार दशक से चली आ रही मानव सेवा की एक मजबूत परंपरा बन चुका है। वर्ष 1983 से ‘रक्तदान महादान’ की भावना के साथ इस अभियान से जुड़े मोहन सिंह समेत जिले के कई सामाजिक कार्यकर्ता और संस्थाएं लगातार जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की व्यवस्था में जुटे हैं। स्वैच्छिक रक्तदान की इस मुहिम ने सिमडेगा को अलग पहचान दिलाई है।

1983 से शुरू हुआ सेवा का सिलसिला

मोहन सिंह वर्ष 1983 से रक्तदान अभियान से जुड़े हैं। वर्ष 1987 में सिमडेगा में अघोर रक्तदान सेवा समिति का विधिवत नामकरण और उद्घाटन सर्वेश्वरी समूह के बड़े सरकार अवधूत भगवान राम जी ने किया था। उस समय समिति से 400 से अधिक सदस्य जुड़े थे। सदस्य सिमडेगा तक सीमित नहीं रहे, बल्कि बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, बंगाल समेत विभिन्न राज्यों के अस्पतालों में जाकर जरूरतमंदों के लिए रक्तदान करते थे। इस पहल से जिले में स्वैच्छिक रक्तदान की मजबूत नींव पड़ी।

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रेड क्रॉस ने अभियान को दी नई मजबूती

जिला गठन के बाद वर्ष 2004 में तत्कालीन उपायुक्त सनोज कुमार झा के प्रयास से सिमडेगा में रेड क्रॉस सोसाइटी का गठन हुआ। मोहन सिंह तब से संस्था के सचिव का दायित्व संभाल रहे हैं। उनके प्रयासों से रेड क्रॉस भवन तैयार हुआ और ब्लड बैंक के संचालन की व्यवस्था विकसित हुई। रेड क्रॉस से अब तक 1026 से अधिक सदस्य जुड़ चुके हैं। संस्था के सदस्य रक्तदान के साथ जिले के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में चिकित्सा सेवा और अन्य सामाजिक कार्यों में भी योगदान देते हैं। रक्तदान और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में योगदान के लिए मोहन सिंह को विभिन्न संस्थाओं और संगठनों द्वारा दो दर्जन से अधिक बार सम्मानित किया जा चुका है। उनका कहना है कि सिमडेगा में ऐसे युवाओं की भी कमी नहीं है, जिन्होंने 50 से अधिक बार रक्तदान किया है।

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अलफलाह सोसाइटी भी दो दशक से सक्रिय

रक्तदान की मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए खुबैब शाहीद ने अलफलाह सोसाइटी की स्थापना की। वह अघोर रक्तदान सेवा समिति और रेड क्रॉस से भी सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। पिछले दो दशक से संस्था रक्तदान के क्षेत्र में काम कर रही है। अलफलाह सोसाइटी से 350 से अधिक सक्रिय सदस्य जुड़े हैं। सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप समूहों के जरिए झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ समेत विभिन्न क्षेत्रों में जरूरतमंदों तक रक्त पहुंचाने और लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करने का काम किया जाता है। संस्था के कार्यों के लिए खुबैब शाहीद को राज्य स्तर पर भी सम्मान मिल चुका है।

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एक दर्जन से अधिक संस्थाएं निभा रहीं भूमिका

सिमडेगा में रक्तदान अभियान को आगे बढ़ाने में सत्य साईं सेवा संगठन, बजरंग दल, मारवाड़ी युवा मंच, अग्रवाल सभा, विश्व हिंदू परिषद, बैंक ऑफ बड़ौदा, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक समेत कई संस्थाएं सक्रिय हैं। इन संस्थाओं से जुड़े लोग समय-समय पर रक्तदान शिविर आयोजित करने के साथ जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की व्यवस्था में भी सहयोग करते हैं।

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सोशल मीडिया बना मदद का माध्यम

सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप समूहों के जरिए भी रक्तदान की मुहिम को लगातार विस्तार मिल रहा है। सोनू ड्रेस वाले विनीत अग्रवाल के नेतृत्व में 500 से अधिक सक्रिय सदस्यों का समूह रक्तदान से जुड़ा है। समूह के माध्यम से झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, बंगाल, हरियाणा समेत देश के विभिन्न हिस्सों में जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त उपलब्ध कराने को लेकर संपर्क और समन्वय किया जाता है।

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ब्लड बैंक में सेवा का भरोसा

ब्लड बैंक के संचालन और रक्तदाताओं को जरूरतमंद मरीजों से जोड़ने में वहां कार्यरत रीना तिग्गा की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जाती है। जरूरत के समय रक्तदाताओं से संपर्क कर मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने में वह लगातार सक्रिय रहती हैं। उनकी तत्परता से नियमित रक्तदाताओं के बीच भी भरोसा बना हुआ है।

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104 से अधिक बार रक्तदान का दावा

व्यवसायी और जादूगर आनंद जैन भी लंबे समय से रक्तदान को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में निभा रहे हैं। उनका दावा है कि वह अब तक 104 से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं। सामाजिक सेवा और रक्तदान के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें विभिन्न मंचों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। इसके अलावा उन्होंने अपने घर को दुर्लभ वस्तुओं के संग्रहालय के रूप में भी विकसित किया है।

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चार दशक की परंपरा, नई पीढ़ी से उम्मीद

सिमडेगा में रक्तदान की यह परंपरा केवल कुछ संस्थाओं या चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं है। चार दशक से अधिक समय में हजारों लोगों ने स्वैच्छिक रक्तदान कर जरूरतमंदों की जिंदगी बचाने में योगदान दिया है। अब सोशल मीडिया और युवा संगठनों की सक्रियता से इस अभियान को और गति मिल रही है। रक्त की जरूरत के समय किसी अनजान मरीज के लिए आगे बढ़कर रक्तदान करना सिमडेगा में धीरे-धीरे सामाजिक जिम्मेदारी और मानव सेवा की मजबूत परंपरा बन चुका है। अब इस सिलसिले को आगे बढ़ाने की उम्मीद नई पीढ़ी से है।

ABOUT THE AUTHOR
शंभू कुमार सिंह

शंभू कुमार सिंह

रिपोर्टर

शंभू कुमार सिंह सिमडेगा के रहने वाले हैं ये 1995 से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत है दैनिक जागरण जिला प्रभारी, भास्कर दैनिक का जिला प्रभारी, सहित की भी चैनल के साथ में अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में लगातार सक्रिय रहे है । समाचार संकलन विशेष लेख फीचर व अन्य क्षेत्रों में भी विशेष पकड़।