Youth dragged from Jamshedpur PCR van and stabbed repeatedly.

जमशेदपुर: पुलिस बनी ‘मूकदर्शक ! पीसीआर वैन से खींचकर युवक को चाकू से गोद डाला; सीसीटीवी में कैद हुई खाकी की लाचारी

Youth dragged from Jamshedpur PCR van and stabbed repeatedly.

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नीरज तिवारी

जमशेदपुर: बिष्टुपुर थाना क्षेत्र स्थित ‘डबल डाउन’ (डीडी) क्लब के बाहर शनिवार देर रात एक ऐसी घटना घटी, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ जहाँ अपराधी सरेआम कानून का मजाक उड़ा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ मौके पर तैनात पुलिसकर्मी महज तमाशबीन बनकर सब कुछ देखते रहे।

पीसीआर वैन के पास हुआ जानलेवा हमला

घटनाक्रम शनिवार देर रात करीब 12 बजे का है। क्लब के अंदर युवतियों से छेड़खानी का विरोध करने पर दो गुटों के बीच विवाद शुरू हुआ था। बाउंसरों ने झगड़ रहे पक्षों को बाहर निकाल दिया, लेकिन बाहर निकलते ही विवाद और गहरा गया।
मामला तब भयावह हो गया जब पुलिस वहाँ पहुँची। वीडियो में साफ दिख रहा है कि पुलिस ने युवकों को सुरक्षित करने के लिए पीसीआर वैन के पास खड़ा किया था। लेकिन, अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि पुलिस की मौजूदगी में ही वे पीसीआर वैन के पास पहुँचे, युवकों को खींचा और पुलिस के सामने ही चाकू से उन पर ताबड़तोड़ वार कर दिए।

मूकदर्शक बनी रही पुलिस

सीसीटीवी फुटेज में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जहाँ अपराधियों का सामना करने और घायलों को बचाने की जिम्मेदारी खाकी की थी, वहीं पुलिसकर्मी मूकदर्शक बनकर पूरी घटना देखते रहे। जहां डंडों से मार कर पैर में गोली मार कर हमलावरों को रोकना चाहिए । वहीं पुलिस सिर्फ उन्हें पकड़ती हुई नजर आ रही है। वहीं पुलिस के सामने अपराधीजिस बेखौफ अंदाज में पुलिस की आंखों के सामने चाकूबाजी की, वह जमशेदपुर की कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है।

घायलों की स्थिति

इस हिंसक हमले में आदित्यपुर निवासी हिमांशु सिंह और प्रत्युष सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। पेट में चाकू लगने से एक युवक की स्थिति नाजुक बताई जा रही है। दोनों को इलाज के लिए तुरंत टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) में भर्ती कराया गया है।घटना में गंभीर रूप से घायल प्रत्युष आनंद की हालत बिगड़ने पर रविवार शाम उसे बेहतर इलाज के लिए कोलकाता के अपोलो अस्पताल रेफर किया गया। वहीं हिमांशु सिंह का इलाज टाटा मुख्य अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में चल रहा है। चिकित्सकों के अनुसार हिमांशु के पेट पर सात गहरे घाव हैं, जबकि प्रत्युष के पेट, छाती और पीठ पर कई गंभीर चाकू के निशान हैं। दोनों की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।
घायलों के परिजनों ने पुलिस पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि मौके पर मौजूद पुलिस समय रहते सख्ती दिखाती तो दोनों युवकों की जान जोखिम में नहीं पड़ती। परिजनों का यह भी आरोप है कि हमले के बाद दोनों युवक करीब आधे घंटे तक सड़क पर तड़पते रहे, लेकिन उन्हें तत्काल अस्पताल नहीं पहुंचाया गया।

पुलिस की कार्रवाई और सवाल

घटना के बाद पुलिस ने एक आरोपी को हिरासत में लिया है और पूछताछ शुरू कर दी गई है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि:

क्या बिष्टुपुर पुलिस अपराधियों को गिरफ्तार करने में अक्षम है?
पुलिस की मौजूदगी में ही पीसीआर के पास चाकूबाजी कैसे हो गई?

क्या क्लबों की सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ दिखावा है?

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