सरना धर्म कोड और परिसीमन के खिलाफ गुमला में उमड़ा आदिवासी जनसैलाब, मंत्री चमरा लिंडा ने किया निर्णायक संघर्ष का आह्वान

निर्मल सिंह
गुमला: सरना धर्म कोड और परिसीमन के मुद्दे पर रविवार को गुमला में आदिवासी समाज ने जोरदार हुंकार भरी। पालकोट रोड स्थित सरना मैदान में सरना प्रार्थना सभा और आदिवासी छात्र संघ के तत्वावधान में आयोजित महारैली में हजारों आदिवासी, छात्र और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि जुटे। रैली में आदिवासी पहचान, सांस्कृतिक अस्मिता और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए व्यापक आंदोलन का आह्वान किया गया।

मुख्य अतिथि आदिवासी कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि **सरना धर्म कोड केवल धार्मिक मांग नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान और अस्मिता का सवाल है।** अलग धर्म कोड के अभाव में जनगणना के दौरान आदिवासियों की वास्तविक संख्या और धार्मिक पहचान स्पष्ट नहीं हो पाती। उन्होंने इस मांग को निर्णायक मुकाम तक पहुंचाने के लिए गांव से लेकर दिल्ली तक आंदोलन तेज करने की जरूरत बताई।

परिसीमन के मुद्दे पर मंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि इससे आदिवासियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षित क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों की राजनीतिक हिस्सेदारी कमजोर करने की कोशिश हो रही है।

महारैली की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा, शिबू सोरेन और कार्तिक उरांव के चित्रों पर माल्यार्पण के साथ हुई। बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने सरना धर्म कोड और आदिवासी अधिकारों के मुद्दे पर समाज की एकजुटता का संदेश दिया।

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