दलमा और मांडू की भू-संरचनाओं को ‘जियोलॉजिकल हैरिटेज’ घोषित करने की मांग
नीरज तिवारी
जमशेदपुर/रांची। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर झारखंड की दो दुर्लभ भूगर्भीय संरचनाओं को राज्य की ‘जियोलॉजिकल हैरिटेज’ (भूगर्भीय धरोहर) घोषित करने की मांग की है।
प्रमुख मांगें: क्या है सरयू राय का सुझाव?
सरयू राय ने राज्य के इन दो महत्वपूर्ण स्थलों के संरक्षण पर जोर दिया है:
दलमा महासागरीय ज्वालामुखी क्षेत्र: यह क्षेत्र करीब 160 करोड़ वर्ष पुराना है। यहाँ ‘पिलो लावा’ जैसी दुर्लभ संरचनाएँ मौजूद हैं, जो महासागरीय ज्वालामुखी विस्फोट का प्रमाण हैं।
मांडू (दूधी नाला) हिमनद संरचना: हजारीबाग जिले में स्थित यह स्थल करीब 30 करोड़ वर्ष पुरानी महादेशीय हिमनदों (glaciers) की भू-संरचना है, जो भूगर्भीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पत्र के मुख्य बिंदु: संरक्षण क्यों जरूरी है?
सरयू राय ने अपने पत्र में इन धरोहरों के संरक्षण के लिए निम्नलिखित तर्क दिए हैं:
अमूल्य प्राकृतिक धरोहर: ये संरचनाएं प्रकृति का अनमोल उपहार हैं। यदि इन्हें समय रहते संरक्षित नहीं किया गया, तो अज्ञानतावश होने वाले मानवीय हस्तक्षेप से ये नष्ट हो सकती हैं।
प्राकृतिक इतिहास के प्रमाण: दलमा क्षेत्र टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने और खनिजों के निर्माण का गवाह है, जबकि दूधी नाला का क्षेत्र प्राचीन हिमनद युग के अवशेषों को संजोए हुए है।
वैज्ञानिक समर्थन: ‘झारखंड खनिज प्रोग्रामिंग बोर्ड’ ने दलमा को हेरिटेज घोषित करने के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी है। साथ ही, ‘जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया’ (GSI) की रांची टीम भी इस क्षेत्र को भूगर्भीय धरोहर के लिए उपयुक्त मानती है।
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